जिस बेटे के साथ रोज कमाने निकलता था पिता, उसी के सामने चली गई जान
हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर यह रही कि मृतक का बेटा अमितोष कुमार खीरहर भी उसी साइडिंग में काम कर रहा था. बुधवार की रात अमितोष के सामने ही लोडर ने उसके पिता को अपनी चपेट में ले लिया. देखते ही देखते मंतोष गंभीर रूप से कुचल गए और उनकी मौत हो गई. आंखों के सामने पिता को खोने के बाद अमितोष बदहवास होकर चीख पड़ा. घटनास्थल पर कुछ देर के लिए अफरा तफरी और चीख पुकार का माहौल बन गया.
डंपिंग साइट पर मौत का खेल? भारी मशीनों के बीच मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
हादसे के बाद साइडिंग में काम कर रहे मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया. साथी मजदूरों का कहना था कि डंपिंग यार्ड में रात के समय भारी मशीनों और वाहनों का लगातार संचालन होता है. ऐसे में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए.
एक मजदूर की मौत ने खोल दी सुरक्षा व्यवस्था की पोल
मंतोष की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि रात के समय भारी लोडर और मजदूर एक ही कार्यक्षेत्र में किस तरह काम कर रहे थे? क्या मशीनों के संचालन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा दूरी और निगरानी की व्यवस्था थी? क्या मजदूरों को सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध कराए गए थे? हादसे ने रेलवे साइडिंग की कार्यप्रणाली और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुलिस पहुंची, आक्रोशित मजदूरों को समझाकर संभाली स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची. हादसे के बाद आक्रोशित मजदूरों और स्थानीय लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए दुमका सदर अस्पताल भेज दिया. पुलिस अब हादसे के कारणों, लोडर के संचालन और चालक की भूमिका समेत घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है.
सदर अस्पताल में मचा कोहराम, परिजनों की चीख से गमगीन हुआ माहौल
मंतोष की मौत की खबर ताराजोड़ा गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया. परिजन रोते बिलखते सदर अस्पताल पहुंचे. जिस पिता के साथ बेटा रोज मेहनत कर परिवार चलाने की उम्मीद में काम करता था, उसी पिता का शव उसके सामने पड़ा था. मंतोष की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. आक्रोशित लोगों ने बीजीआर कंपनी द्वारा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी है.
मजदूर की मौत का जिम्मेदार कौन? जांच के साथ जवाबदेही भी जरूरी
यह हादसा सिर्फ एक मजदूर की मौत नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल है. अब जरूरत है कि जांच महज कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे. यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी या किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए, ताकि किसी दूसरे मजदूर के परिवार को ऐसी दर्दनाक तस्वीर न देखनी पड़े.
रिपोर्ट : पंचम झा
