झारखण्ड के गढ़वा जिले से खास लगाव था प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का, उनके निधन से स्थानीय लोगो मे शोक की है लहर, 1986 मे रंका राज परिवार गढ़ मे हुई थी आज का रॉबीन हुड की सूटिंग, उस समय पांच सौ लोगो की उमड़ी थी भीड़ शूटिंग देखने के लिए। रंका राजमहल में आज भी जिंदा है नाना पाटेकर की याद, करीब चार दशक पहले चार दिनों तक ठहरे थे नाना पाटेकर दो दिन हुई थी शूटिंग।
सीखना है तो गिरना है चिपक कर बैठना होगा घोड़ा पर। यह डायलॉग था नाना पाटेकर का ज़ब वह गढ़वा के रंका गढ़ के शूटिंग के दौरान अपने बेटे को घोड़ा पर चढ़ाते हुए यह वाक्य उन्होंने बोला था। आज यह दमदार आवाज, बेबाक संवाद अदायगी और किरदार में पूरी तरह ढल जाने वाले अभिनय के लिए मशहूर नाना पाटेकर के निधन की खबर ने देशभर के प्रशंसकों को गमगीन कर दिया है। लेकिन गढ़वा के रंका के लोगों के लिए नाना पाटेकर की याद महज सिनेमा के पर्दे तक सीमित नहीं है। उनकी स्मृतियां आज भी रंका राजमहल की पुरानी दीवारों और अतिथि कक्ष से जुड़ी हुई हैं। करीब चार दशक पहले वर्ष 1988 में निर्देशक तपन सिन्हा की फिल्म ‘आज का रॉबिनहुड’ की शूटिंग रंका राजमहल में हुई थी। इस फिल्म में नाना पाटेकर के साथ उत्पल दत्त, रबी घोष, अनिल चटर्जी और सतीश शाह जैसे चर्चित कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म की शूटिंग के दौरान रंका अचानक फिल्मी गतिविधियों का केंद्र बन गया था। रंका निवासी चंद्रशेखर तिवारी के अनुसार, नाना पाटेकर मेदिनीनगर (तत्कालीन डाल्टनगंज) निवासी एमएल विश्वास के साथ रंका पहुंचे थे। उस दौर में एमएल विश्वास क्षेत्र के चर्चित और संपन्न लोगों में गिने जाते थे और उनका संपर्क फिल्म जगत से भी था। बताया जाता है कि नाना पाटेकर करीब दो दिनों तक रंका में रुके थे। इस दौरान उन्होंने रंका राजमहल के अतिथि कक्ष में समय बिताया था। जैसे ही उनके रंका पहुंचने की खबर आसपास के इलाके में फैली, लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए राजमहल के आसपास जुटने लगी। आज मोबाइल और इंटरनेट के दौर में कलाकारों की तस्वीरें घर बैठे देखना आसान है। लेकिन उस समय स्थिति बिल्कुल अलग थी। बड़े पर्दे के किसी चर्चित अभिनेता को सामने से देखना स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। नाना पाटेकर को देखने के लिए राजमहल के आसपास लोगों की भीड़ जुट गयी थी। स्थानीय लोगों के लिए यह पहला मौका था, जब वे किसी बड़े फिल्म कलाकार को इतनी नजदीक से देख पा रहे थे। शूटिंग के दौरान रंका का माहौल भी पूरी तरह बदल गया था।
आज का रॉबिनहुड’ जब भी रंका के लोगों के सामने आएगी, वह सिर्फ एक पुरानी फिल्म नहीं होगी। उसके साथ रंका राजमहल, चार दशक पुरानी शूटिंग और यहां करीब दो दिनों तक ठहरे नाना पाटेकर की याद भी जुड़ी रहेगी। रंका राजमहल के लिए नाना पाटेकर से जुड़ी यह कहानी भी ऐसी ही एक याद है—जहां चार दशक पहले एक अभिनेता आया था, शूटिंग हुई थी और कुछ दिनों के लिए पूरा इलाका फिल्मी रंग में रंग गया था। आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन रंका राजमहल की पुरानी दीवारों से जुड़ा उनका वह किस्सा स्थानीय लोगों की यादों में लंबे समय तक जिंदा रहेगा।
