गुमला (GUMLA): झारखंड में धर्मांतरण और जमीन दलालों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत से उनके परिवार और करीबियों में शोक की लहर है. निशा भगत ने रांची स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी. घटना के बाद गुमला में रहने वाले उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पोस्टमार्टम के बाद परिजन बीती रात उनका पार्थिव शरीर लेकर गुमला पहुंचे, जहां अब अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं. पूरे घर में मातम पसरा है और परिवार के साथ-साथ आसपास के लोग भी इस घटना से बेहद दुखी हैं.
आदिवासी अस्मिता के लिए लगातार उठाती थीं आवाज
निशा भगत झारखंड में आदिवासी अस्मिता और अधिकारों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही थीं. उनका आंदोलन केवल जिला और राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी आवाज दिल्ली तक पहुंच चुकी थी. ऐसे में उनकी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया, यह जांच का विषय है. परिवार भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है.
पिता ने की CBI जांच की मांग
निशा भगत के पिता हदू भगत ने मामले की CBI जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक इस मामले की गहराई से जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी. वहीं, आसपास के लोगों ने निशा भगत के साहस और संघर्ष को याद करते हुए दुख जताया है. लोगों का कहना है कि आदिवासी समाज और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली निशा की मौत से सभी स्तब्ध हैं.
करीबियों ने भी जताया दुख
निशा के साथ काम करने वाले लोगों का भी दर्द सामने आ रहा है. उनके सहयोगियों का कहना है कि निशा हमेशा अपने विचारों और संघर्ष को लेकर मुखर रहती थीं. उनकी असमय मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है.
रिपोर्ट- सुशील कुमार सिंह
