पाकुड़ में विकास के दावों की खुली पोल, सड़क नहीं होने से खटिया बनी एंबुलेंस, 4 किलोमीटर तक गर्भवती को ढोते रहे ग्रामीण

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Digital News Desk • November 5, 2026

पाकुड़(PAKUR): सरकार गांव-गांव तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन पाकुड़ जिले के मासधारी गांव की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही है. यहां आज भी सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ता है. बुधवार को एक बार फिर ऐसी ही दर्दनाक तस्वीर सामने आई, जब प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने करीब 4 किलोमीटर तक खटिया पर ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया.

पाकुड़(PAKUR): सरकार गांव-गांव तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन पाकुड़ जिले के मासधारी गांव की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत बयां कर रही है. यहां आज भी सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ता है. बुधवार को एक बार फिर ऐसी ही दर्दनाक तस्वीर सामने आई, जब प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने करीब 4 किलोमीटर तक खटिया पर ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया.

सड़क नहीं, इसलिए नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस

मामला लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिट्टीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत मासधारी गांव का है. जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब 4 बजे गांव निवासी पीरका पहाड़िया की 25 वर्षीय पत्नी बागी पहाड़िन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. महिला की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे अस्पताल पहुंचाने की तैयारी करने लगे. लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी.

ऐसे में ग्रामीणों ने खटिया को ही एंबुलेंस बना लिया. महिला को खटिया पर लिटाकर कई लोग कंधों के सहारे करीब 4 किलोमीटर तक पैदल चले और उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाया, ताकि वहां से अस्पताल ले जाया जा सके.

हर बार मरीजों को उठाकर ले जाने की मजबूरी

ग्राम प्रधान बैदा पहाड़िया ने बताया कि गांव से मुख्य सड़क की दूरी करीब 4 किलोमीटर है. सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोगों को आए दिन ऐसी परेशानियों से गुजरना पड़ता है. सबसे ज्यादा दिक्कत तब होती है, जब कोई बीमार पड़ जाता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है. उन्होंने जिला प्रशासन से गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग की है. अब सवाल यह है कि विकास के दावों के बीच मासधारी गांव को सड़क की सुविधा कब मिलेगी? आखिर कब तक यहां के ग्रामीण मरीजों को खटिया पर उठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर रहेंगे?