1984 सिख कत्लेआम के 73 शहीदों को चास गुरुद्वारे ने दी श्रद्धांजलि, बनाई ‘सच की दीवार’

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Digital News Desk • November 1, 2026

बोकारो (BOKARO): 1984 के सिख कत्लेआम को 42 साल गुजर चुके हैं, लेकिन उस दौर में अपनों को खोने वाले परिवारों का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है. किसी ने अपने पिता को खोया, तो किसी ने भाई और किसी ने परिवार के कई सदस्यों को. इतने साल बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं. इसी दर्द और संघर्ष को याद रखने के लिए बोकारो के चास गुरुद्वारा साहिब में 'सच की दीवार' बनाई गई है. इस दीवार पर कत्लेआम में जान गंवाने वाले 73 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं.

बोकारो (BOKARO): 1984 के सिख कत्लेआम को 42 साल गुजर चुके हैं, लेकिन उस दौर में अपनों को खोने वाले परिवारों का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है. किसी ने अपने पिता को खोया, तो किसी ने भाई और किसी ने परिवार के कई सदस्यों को. इतने साल बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं. इसी दर्द और संघर्ष को याद रखने के लिए बोकारो के चास गुरुद्वारा साहिब में 'सच की दीवार' बनाई गई है. इस दीवार पर कत्लेआम में जान गंवाने वाले 73 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं.

73 नाम, हर नाम के पीछे एक दर्दनाक कहानी

चास गुरुद्वारा साहिब में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान 'सच की दीवार' को संगत को समर्पित किया गया. इस मौके पर गुरुद्वारे में कीर्तन और अरदास के बीच उन लोगों को याद किया गया, जिन्होंने 1984 के हिंसक दौर में अपनी जान गंवाई थी. दीवार पर लिखे गए 73 नाम सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन परिवारों की यादें हैं, जिन्होंने अपनों को खोने का दर्द झेला है. इस पहल का मकसद आने वाली पीढ़ियों को इतिहास के उस काले अध्याय से परिचित कराना और शहीदों की यादों को हमेशा जिंदा रखना है.

पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने की मांग

कार्यक्रम में ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी भारत अध्यक्ष सतनाम सिंह गंभीर भी शामिल हुए. वह झारखंड में 1984 के सिख कत्लेआम से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि चार दशक से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय और उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है. ऐसे में उनकी लड़ाई जारी रहनी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार मिल सके. उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई.

आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाएगी सच की दीवार

चास गुरुद्वारा साहिब के प्रधान जसमीत सिंह सोढ़ी ने बताया कि इस दीवार को बनाने का मुख्य उद्देश्य शहीदों की यादों को सुरक्षित रखना है. दीवार पर दर्ज 73 नाम आने वाली पीढ़ियों को उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाते रहेंगे, जिसे भुलाया नहीं जाना चाहिए. सिख समाज की मांग है कि पीड़ित परिवारों को न्याय मिले, दोषियों पर कार्रवाई हो और प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए.