जन्माष्टमी के अगले दिन दही से सराबोर हुए बाबा बैद्यनाथ, 22 मंदिरों में निभाई गई प्राचीन परंपरा

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Digital News Desk • September 5, 2026

देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में जन्माष्टमी के अगले दिन एक बार फिर सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा निभाई गई. कृष्ण जन्मोत्सव की खुशी में बाबा बैद्यनाथ के मनोकामना लिंग पर हांडी से दही चढ़ाया गया.

देवघर: देवघर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में जन्माष्टमी के अगले दिन एक बार फिर सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा निभाई गई. कृष्ण जन्मोत्सव की खुशी में बाबा बैद्यनाथ के मनोकामना लिंग पर हांडी से दही चढ़ाया गया. इस दौरान बाबा भोलेनाथ दही से सराबोर हो गए.

बैद्यनाथ धाम की प्राचीन परंपरा के तहत जन्माष्टमी के अगले दिन बाबा बैद्यनाथ को दही अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इसी क्रम में सरदार पंडा पंडित गुलाबानंद ओझा ने षोडशोपचार पूजा के बाद बाबा बैद्यनाथ को दही अर्पित किया. यह अनुष्ठान मंदिर परिसर स्थित सभी 22 मंदिरों में भी विधिवत संपन्न कराया गया.

सरदार पंडा पंडित गुलाबानंद ओझा ने इस परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यता बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय कंस के कारागार में हुआ था. जन्म के बाद वासुदेव भगवान कृष्ण को मथुरा से गोकुल लेकर पहुंचे, जहां उनका पालन-पोषण यशोदा मैया और नंद बाबा के यहां हुआ.

मान्यता है कि जब सुबह ग्रामीणों को नंद के घर लल्ला के जन्म की खबर मिली, तो पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. इसी खुशी में लोगों ने एक-दूसरे पर घी, माखन, दूध और दही लगाकर उत्सव मनाया था. इसी धार्मिक मान्यता और खुशी की स्मृति में बैद्यनाथ धाम में जन्माष्टमी के अगले दिन बाबा पर दही चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है.

अनुष्ठान पूरा होने के बाद गर्भगृह में जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं का प्रवेश निषेध कर दिया गया. इस दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ के दर्शन-पूजन किए.