गुमला: झारखंड गठन के 25 साल बाद भी गुमला जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों में कई गांव ऐसे हैं, जहां आज तक मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं. ऐसा ही एक गांव है तेतरकोना, जहां सड़क सुविधा का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है. खासकर बारिश के मौसम में गांव तक पहुंचना और वहां से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है.
ग्रामीणों के अनुसार, गर्मी के दिनों में खेती योग्य जमीन और कच्चे रास्ते से होकर किसी तरह गांव तक आवागमन हो जाता है, लेकिन बरसात शुरू होते ही स्थिति बेहद खराब हो जाती है. बारिश के कारण खेतों और कच्चे रास्तों में पानी व कीचड़ भर जाता है, जिससे गांव तक पहुंचने वाला रास्ता लगभग बंद हो जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को एक संकरे और पगडंडीनुमा रास्ते से पैदल आवागमन करना पड़ता है.
सबसे अधिक परेशानी उस समय होती है, जब किसी ग्रामीण की तबीयत खराब हो जाए. सड़क नहीं होने के कारण चारपहिया वाहन और एंबुलेंस जैसे वाहन गांव तक आसानी से नहीं पहुंच पाते. मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गांव तक विकास योजनाओं का लाभ भी अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पाता है.
ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क की समस्या का असर बच्चों की पढ़ाई और किसानों के काम पर भी पड़ता है. बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है, वहीं किसानों को कृषि सामग्री लाने-ले जाने और अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में मुश्किल होती है. बरसात के दिनों में गांव का संपर्क बाहरी क्षेत्र से लगभग कट जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं. इसलिए तमाम परेशानियों के बावजूद वे गांव छोड़कर स्थायी रूप से बाहर नहीं जा सकते. वहीं, रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए जाने वाले कई लोग गांव की खराब स्थिति के कारण वापस लौटने में भी हिचकते हैं.
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तेतरकोना गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सड़क बनने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का लाभ भी बेहतर तरीके से मिल सकेगा.
अब देखना होगा कि ग्रामीणों द्वारा उठाई गई इस समस्या पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से क्या कदम उठाया जाता है. फिलहाल तेतरकोना की तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि विकास के दावों के बीच आज भी कई ग्रामीण इलाकों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का इंतजार कब खत्म होगा.
