रांची (RANCHI): झारखंड हाईकोर्ट परिसर में फुटबॉल ग्राउंड बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है. इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए एक याचिका दायर की है. गुरुवार को इस याचिका का उल्लेख झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अदालत में किया गया और मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया गया. अधिवक्ताओं की ओर से रखे गए आग्रह को स्वीकार करते हुए अदालत ने याचिका से जुड़े सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है. साथ ही मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए आगामी सोमवार की तिथि निर्धारित की गई है. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है.
हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी के महासचिव नवीन कुमार ने बताया कि याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हाईकोर्ट परिसर की खाली जमीन का उपयोग फुटबॉल ग्राउंड बनाने के बजाय अधिवक्ताओं की बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि वर्तमान में हाईकोर्ट परिसर में वकीलों के लिए उपलब्ध चैंबर और बैठने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. खासकर नए अधिवक्ताओं को बैठने और अपने मुवक्किलों से मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसलिए उपलब्ध भूमि का उपयोग अधिवक्ताओं के हित में किया जाना अधिक आवश्यक है.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ और युवा अधिवक्ता अदालत में मौजूद रहे और इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया. अधिवक्ताओं का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पहले वकीलों की कार्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि यदि परिसर में नए चैंबर, बैठने की जगह और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो इससे न्यायिक कार्यों के संचालन में भी सहूलियत होगी. अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी.
