धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल में बिना किसी मेहनत के बिना किसी उद्योग-व्यवसाय के अफरात आमदनी ने बहुतों को कोयलांचल में आने को प्रेरित किया था. ऐसा हुआ भी, जिसका वर्णन आगे किया जाएगा, लेकिन फिलहाल जनता मजदूर संघ के उदय की कहानी जान लीजिये. बुजुर्ग लोग बताते हैं कि सूर्यदेव सिंह पहले राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ में ही थे. बीपी सिन्हा के वह प्रबल समर्थक थे, लेकिन जब ताकत बढ़ी तो टकराव भी बढ़ा और इसके बाद बात बिगड़ती चली गई. लोग बताते हैं कि एक समय धनबाद के पूर्व सांसद और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के दिग्गज नेता रामनारायण शर्मा ने कुस्तौर में संघ की सभा आयोजित की थी. सूर्य देव सिंह ऐसा नहीं करने के लिए कह रहे थे, फिर भी सभा हुई तो सभा में विघ्न डालने के लिए शामियाने के रस्से को काट दिया गया और वहां जुटी भीड़ में भगदड़ मच गई. शायद, सूर्यदेव सिंह ने अपना अलग यूनियन खड़ा करने की सोच के साथ यह काम कराया था.
गठन के बाद कैसे चल निकला जनता मजदूर संघ
उसके बाद वह जनता मजदूर संघ का गठन किया. जनता मजदूर संघ चल निकला. उस समय राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की पूरे कोयलांचल में खूब चलती थी. संघ की अनुमति के बिना कुछ होता नहीं था. लेकिन अब राष्ट्रीय कोयलारी मजदूर संघ के समानांतर जनता मजदूर संघ खड़ा होने लगा था. सूर्यदेव सिंह की ताकत बढ़ने लगी थी. राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के नेताओं की चिंता भी बढ़ने लगी थी. बिंदेश्वरी दुबे उस समय राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के अध्यक्ष थे. अब वह बिहार के मुख्यमंत्री बन गए थे. फिर उन्होंने कोयलांचल पर ध्यान केंद्रित किया और जनता मजदूर संघ की बढ़ती ताकत को रोकने का तरीका निकाला.
दर्ज मुकदमों की सूची बनाई गई और शुरू हुआ एक्शन
उन्होंने धनबाद में माफिया उन्मूलन कार्यक्रम शुरू कराया. इसके लिए धनबाद में उपायुक्त के तौर पर तेज-तर्रार अधिकारी मदन मोहन झा को भेजा गया. वह धनबाद आते ही धनबाद में और अन्य जिले के सभी माफियाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों के रिकॉर्ड एकत्रित कराना शुरू किया. इसके लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति हुई. जानकार बताते हैं कि सूर्यदेव सिंह पर तीन दर्जन से अधिक मामले निकले थे. सूर्यदेव सिंह के अलावे सकलदेव सिंह, रघुनाथ सिंह, सत्यदेव सिंह, नौरंग देव सिंह और रामचंद्र सिंह पर भी पिछले रिकार्ड के आधार पर मामले तैयार किए गए थे. उसके बाद माफिया ट्रायल की कार्रवाई शुरू हुई.
माफिया ट्रायल में कुल 42 मामले लिए गए थे
जानकार बताते हैं कि माफिया ट्रायल में कुल 42 मामले लिए गए थे. अब माफियायो में परेशानी बढ़ने लगी थी. माफिया चाहते थे कि ट्रायल को किसी न किसी तरह टाला जाए. कम से कम इतना जरूर हो कि बिहार में मुख्यमंत्री के तौर पर बिंदेश्वरी दुबे का कार्यकाल समाप्त हो जाए. इधर, मार्क्सवादी समन्वय समिति के नेता एके राय माफियाओ से टक्कर लेने और उन्हें कोयलांचल से मार भगाने का बीड़ा उठा लिया था. इसके लिए कई आंदोलन हुए. माफियाओं के आर्थिक स्रोत पर प्रहार किए गए. उनके हाथ से बालू का ठेका-पट्टा ले लिया गया और सहयोग समितियों का गठन करा कर उनके हाथ में ठेका-पट्टा दे दिया गया. क्योंकि सहयोग समितियों की पीठ पर प्रशासन का हाथ था, इसलिए माफिया चाह कर भी उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाए थे. हालांकि जानकार बताते हैं कि इस क्रम में कुछ हत्याएं भी हुई थी. माफियायों के कई ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी भी हुई थी.

