कौन है वासेपुर का डॉन फहीम खान, जानिए क्यों मांग रहा सरकार से रहम की भीख 

कौन है वासेपुर का डॉन फहीम खान, जानिए क्यों मांग रहा सरकार से रहम की भीख

धनबाद (DHANBAD): वासेपुर का डॉन फहीम खान आज रहम की भीख मांग रहा है. आखिर ऐसा क्यों कहा जा रह है. इसकी कहानी की शुरुआत होती है 1983 से, जब फहीम खान के पिता शफी खान की हत्या बरवाअड्डा के एक पेट्रोल पंप पर कर दी गई थी. उसके बाद 1986 का वर्ष रहा होगा, धनबाद कोर्ट परिसर में फहीम खान के बड़े भाई शमीम खान को दिन-दोपहर गोलियों से भून दिया गया था. उसके बाद फहीम खान सक्रिय हुआ और वह डॉन बन गया. जानकार बताते हैं कि नया बाजार और वासेपुर में उसके बाद गैंगवार की शुरुआत हुई. वासेपुर और नया बाजार में गैंगवार का लंबा इतिहास रहा है. 

प्रतिशोध की आग : एक के बाद एक मर्डर किये गए 

एक मर्डर के प्रतिशोध में कई मर्डर किए गए. 1989 में फहीम खान के छोटे भाई को रांगाटांड़ रेलवे लाइन के पास पत्थर से कूच दिया गया था. कई दिनों तक अस्पताल में कोमा में रहने के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी. उसके बाद फहीम खान पर कई हत्याओं के आरोप लगे. इन्हीं में से एक सागिर की हत्या के मामले में फहीम खान को 2011 में आजीवन कारावास की सजा हो गई और उसके बाद से वह जेल में है. ऐसे में अब वह रिहाई की गुहार कर रहा है. फहीम खान पर जेल में रहते हुए भी कई आरोप लगे. साबिर आलम पर हमला, रेलवे ठेकेदार इरफान खान और धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या और कई फायरिंग की घटनाओं में फहीम खान का नाम आया. फहीम खान अभी भी जेल में हैं. 

 

मां और मौसी की हत्या के बाद विचलित हुआ था फहीम 
 
जानकार बताते हैं कि फहीम खान अपनी मां और मौसी की हत्या के बाद से और अधिक विचलित हो गया. यह हत्याएं धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग पर की गई थी. इन हत्याओं की चर्चा खूब चली थी. उस समय कहा गया था कि वासेपुर और नया बाजार में चल रहे गैंगवार की यह घटना परिणति थी. यह अलग बात है कि नया बाजार और वासेपुर के गैंगवार में कई घटनाएं हुई. उसे समय गैंगवार में शामिल कई लोग अब इस दुनिया में नहीं है. जानकार बताते हैं कि फहीम खान के पिता धनबाद के तोपचांची झील में मछली मारने का ठेका लिए हुए थे. वह अक्सर तोपचांची झील जाते थे. उस समय तोपचांची झील झरिया माइन्स बोर्ड के पास था. वहीं से लौट के क्रम में वह अपनी अम्बेस्डर कार में बरवाअड्डा के पेट्रोल पंप पर तेल भरवा रहे थे कि टोह में लगे अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी.  

हिल कॉलोनी के मजार कैंपस में हुई नजीर की हत्या, गैंगवार का चर्चित अध्याय था

यह हत्या भी गैंगवार का नतीजा ही बताया गया था. उसके बाद एक चर्चित हत्याकांड हुआ था. लोग बताते हैं कि वार्ड पार्षद नजीर की हिल कॉलोनी में दिन दोपहर हत्या कर दी गई थी. उस समय धनबाद के एसपी राजेश चंद्र हुआ करते थे. उसे हत्याकांड के बाद भी पुलिस एक्शन में आई थी. जानकार बताते हैं कि 1988 में हिल कॉलोनी के मजार कैंपस में हुई नजीर की हत्या गैंगवार का चर्चित अध्याय था. फहीम खान की अदावत साबिर आलम से भी कई सालों तक चली. इस अदावत में भी कई हत्याएं हुई. जानकार यह भी बताते हैं कि साबिर आलम और फहीम खान कभी साथ हुआ करते थे, लेकिन बाद में अदावत इतनी बढ़ी कि एक दूसरे के जान के दुश्मन बन गए.  

बिहार के बाहुबली भी रहते थे फहीम के संपर्क में

लोग बताते हैं कि एक समय मछली के कारोबार और रेलवे के टेंडर में फहीम खान का लगभग एकाधिकार था. बिहार के बाहुबली भी फहीम खान के संपर्क में रहते थे और रेलवे के बड़े-बड़े ठेके में काम करते थे. लोग बताते है कि फहीम खान कुछ साल पहले जब अपने बच्चों के निकाह में पेरोल पर धनबाद आया था, तो कहा था कि कानून के हाथ लंबे होते है. उस समय वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा था. हालांकि लोग बताते हैं कि फहीम खान अब जेल की जिंदगी से ऊब गया है और रिहाई की गुहार लगा  रहा है. वह कई बीमारियों से पीड़ित हो गया है. नया बाजार और वासेपुर के बीच गैंगवार शांत हुआ, तो फहीम के भांजों से ही उसके परिवार की अदावत शुरू हो गई है. फहीम खान का भांजा कुख्यात प्रिंस खान वीडियो जारी कर कहता रहा है कि वह फहीम खान के परिवार को खत्म कर ही दम लेगा.