अज़ब-गज़ब : दुनिया का अनोखा बाजार, जहां सामान खरीदने नहीं, पुराने प्रेमी प्रेमिका से मिलने आते हैं लोग

वियतनाम में लगने वाला यह अनोखा लव मार्केट दुनिया के बाकी बाजारों से बिल्कुल अलग है. यहां लोग सामान खरीदने नहीं, बल्कि साल में एक बार अपने पुराने प्रेमी-प्रेमिका से मिलने आते हैं. दिलचस्प बात यह है कि कई लोग अपने वर्तमान पति या पत्नी के साथ यहां पहुंचते हैं. आखिर क्या है इस अनोखे बाजार की दर्द भरी प्रेम कहानी और कैसे शुरू हुई यह परंपरा, जानिए पूरी कहानी.

अज़ब-गज़ब : दुनिया का अनोखा बाजार, जहां सामान खरीदने नहीं, पुराने प्रेमी प्रेमिका से मिलने आते हैं लोग

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बाजार का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में खाने-पीने की सामान, कपड़े, जूते-चप्पल, सब्जियां, फल और बहुत सारी चमक-धमक आ जाती है. क्योंकि बाजार इसीलिए होता है, जहां सामान खरीदे और बेचे जाते हैं. बाजार लोग सामान की खरीदारी के लिए ही जाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे अजीबोगरीब बाजार के बारे में बताने वाले हैं, जहां लोग सामान खरीदने नहीं जाते, सामान बेचने नहीं जाते हैं, बल्कि यहां यह बाजार इसलिए लगाया जाता है, जहां लोग अपने पुराने प्रेमियों से मिलने जाते हैं. आपका दिमाग चकरा गया ना लेकिन यह बात सच है. मार्केट को लव मार्केट के नाम से भी जाना जाता है. चलिए बताते हैं ये मार्केट कहां है और क्यों लगाया जाता है.

पुराने प्रेमी प्रेमिका से मिलने आते हैं लोग

इस प्यार के बाजार में बिछड़े हुए प्रेमी-प्रेमिका साल में एक बार एक-दूसरे से मिलते हैं. इसीलिए एकत्रित होते हैं.सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोग अपने पुराने प्रेमी या प्रेमिका से मिलने के लिए अपने वर्तमान के पति या पत्नी के साथ ही जाते हैं. उनके सामने ही बातचीत होती है. लेकिन हैरानी की बात है कि वर्तमान के पति-पत्नी को उनके प्रेमी से कोई फर्क नहीं पड़ता और खुशी-खुशी उन्हें बाजार से वापस लौट आते हैं. कोई जलन या झगड़ा नहीं देखा जाता.आपको बता दें कि इसकी खूबसूरती यह भी है कि जहां यह बाजार लगता है, वह जगह काफी सुंदर है. पथरीली पहाड़ियां, घुमावदार रास्ते और हरे-भरे घाटियां हैं, जिसको यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के नाम से जाना जाता है. जहां इतने अच्छे खूबसूरत माहौल में जब पुराने प्रेमी से लोग मिल जाते हैं, तो और ज्यादा रोमांस बढ़ जाता है.

कैसे शुरू हुआ यह बाजार 

आपको बता दें कि हर साल तीसरे चंद्रमास की 27 तारीख को यह आयोजन होता है, जो अप्रैलया मई में आमतौर पर होता है. यह एक दिन का कार्यक्रम होता है, लेकिन सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ यह दो से तीन दिन तक चलता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह बाजार आज से नहीं लग रहा है, बल्कि यह पिछले 100 साल से लग रहा है. यानी साल 1919 के आसपास से इस बाजार की शुरुआत हुई थी.अब चलिए आपको बता देते हैं कि इसकी शुरुआत क्यों और कैसे हुई. आपको बता दें कि इस बाजार के शुरू करने के पीछे एक दर्द भरी कहानी है, जहां नुंग जाति के एक युवक और गियाई जाति की युवती एक-दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करते थे. लड़का काफी गरीब था, लेकिन बहुत सुंदर गाना गाता था और बांसुरी बजाने में काफी माहिर था. लेकिन लड़की किसी कबीले के सरदार की बेटी थी. अलग-अलग जाति होने और रीति-रिवाज की वजह से लड़की के परिवार वाले इसका विरोध करते थे. कहा जाता है कि दोनों के परिवारों में आपस में झगड़े होने लगे और खून-खराबा शुरू हो गया. जब लड़का-लड़की ने दोनों यह चीजें देखीं, तो उन्होंने समझदारी से अलग होने का फैसला लिया. लेकिन उन्होंने एक वादा किया कि हर साल तीसरे चंद्रमास की 27 तारीख को वे खौ वाई की घाटी में मिलेंगे, एक-दूसरे को गाने सुनाएंगे, साल भर क्या-क्या हुआ, वह बातें करेंगे और फिर अपने वर्तमान जीवन में लौट जाएंगे.

समय बीतता गया. दोनों की शादी दूसरे इंसानों से हो गई, लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं तोड़ा, क्योंकि उन्होंने खून की कसम खाई थी. सालों तक वे अपने वादे को निभाते रहे और बुढ़ापे में भी यहां आकर मिलते थे. ऐसा माना जाता है कि अंतिम समय में भी दोनों एक-दूसरे की बाहों में ही मर गए. उनकी याद में लोगों ने मंदिर बनवाया, जहां पूजा की जाती है. इसी परंपरा को लोग आज भी निभाते हैं और ऐसे प्रेमी-प्रेमिका, जिनकी शादी नहीं हो पाई और वे बिछड़ गए, फिर भी इस मेले में आकर मिलते हैं.आपको बता दें कि यह अनोखा मेला वियतनाम के उत्तर में स्थित पहाड़ी इलाकों में लगता हैआज वर्तमान युग में एक तरफ जहां ब्रेकअप होने के बाद गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं और शादी के बाद एक-दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते, ऐसे में यहां का बाजार एक उदाहरण है कि पहले के लोग प्यार का मतलब क्या समझते थे. प्यार का मतलब केवल पा लेना ही नहीं होता.