पहले पकड़े महिला के बाल, घसीटते हुए ले गया ससुराल, फिर सर धड़ से कर दिया अलग.... पढ़िए खौफनाक वारदात
डेढ़ एकड़ जमीन के विवाद में 28 वर्षीय महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई. आरोप है कि महिला को पहले रास्ते से घसीटकर ससुराल ले जाया गया और फिर धारदार हथियार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): कहा जाता है कि शादी के बाद लड़की ससुर ही उसका असली घर होता है. पर क्या हो जब वही ससुराल वाले लड़की के जान के दुश्मन बन जाएं, तो महिला के पास क्या चारा बचेगा. ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां ससुराल वलाओं ने अपनी बहु के साथ ऐसी हैवानियत की जिसे जान आपका भी कलेजा कांप उठेगा.
मामला जुड़ा है तेलंगाना के महबूबनगर जिले से जहां डेढ़ एकड़ जमीन के विवाद में 28 वर्षीय महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई. आरोप है कि महिला को पहले रास्ते से घसीटकर ससुराल ले जाया गया और फिर धारदार हथियार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया. इस खौफनाक घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है.
मृतका की पहचान महबूबनगर मंडल के ओबुलाय्यापल्ली गांव निवासी सुनीता के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, सुनीता कोइलकोंडा मंडल के चिंथल थांडा स्थित अपने खेत की ओर जा रही थी. इसी दौरान उसके ससुर माणिक्य नाइक, देवर मान्या नाइक, पांडु नाइक और पांडु की पत्नी पार्वती ने उसे रास्ते में रोक लिया.
आरोप है कि चारों ने सुनीता के गले में कपड़ा बांधकर उसे घसीटते हुए अपने घर पहुंचाया. वहां चाकू से हमला कर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई. हमले में महिला का सिर धड़ से अलग कर दिया गया. ऐसे में घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए महबूबनगर सरकारी जनरल अस्पताल भेज दिया.
डेढ़ एकड़ जमीन बनी हत्या की वजह
पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे जमीन विवाद को मुख्य वजह माना जा रहा है. दरअसल, सुनीता की शादी करीब 12 साल पहले चिंथल थांडा निवासी बलराम से हुई थी. दंपति की दो बेटियां हैं. बताया जाता है कि बलराम मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था, जिसके कारण दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था.
ऐसे में करीब एक साल पहले गांव के बुजुर्गों ने हस्तक्षेप कर पति-पत्नी के बीच समझौता कराया था. इस दौरान सुनीता और उसकी दोनों बेटियों का भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से बलराम की डेढ़ एकड़ जमीन उसके नाम कर दी गई थी. हालांकि, जमीन के इस हस्तांतरण से बलराम के बड़े भाइयों पांडु नाइक और मान्या नाइक नाराज थे. वे लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे थे.
गांव छोड़ने का बनाया जा रहा था दबाव
पुलिस के मुताबिक, जमीन को लेकर परिवार में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था. आरोप है कि दोनों भाइयों ने बलराम और सुनीता को साथ रहने से भी रोका. पारिवारिक तनाव से परेशान होकर सुनीता अपने मायके ओबुलाय्यापल्ली चली गई थी. बाद में माता-पिता ने उसे वापस चिंथल थांडा लौटने के लिए मनाया और उसके रहने के लिए अलग घर भी बनवाया. वह पिछले एक महीने से अपनी दोनों बेटियों के साथ वहीं रह रही थी. इसके बावजूद ससुराल पक्ष के लोग उस पर जमीन छोड़ने और गांव से चले जाने का दबाव बना रहे थे. पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सुनीता को संपत्ति नहीं छोड़ने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई थी.