डॉक्टर ने निकाल ली बच्चे की आंख...! मोबाइल छुड़ाने के लिए किया ऐसा हाल, वीडियो देख दहल जाएगा कलेजा
खटीमा के निजी स्कूल में बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए आंखें निकालने का डर दिखाने वाली गतिविधि का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल के बच्चों में यह अमूमन देखा गया है कि बच्चे ना बिना फोन के खाना खाएंगे, ना सोएंगे, ना कोई और ऐक्टिविटी करेंगे. हालात ऐसे हैं कि बच्चे को अगर शांत कराना हो तो उन्हें ना मां चाहिए ना पिता, सिर्फ उनके हाथ में फोन पकड़ा दीजिए. आजकल यह परेशानी घर-घर की बन चुकी है. ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए एक स्कूल में अनोखी तरकीब देखने को मिली है. यहाँ स्कूल के एक बच्चे की आँख निकालने की बात सामने आई है.
दरअसल बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में एक निजी स्कूल में अपनाया गया तरीका अब सवालों के घेरे में है. यहां स्कूल में बच्चों को स्मार्टफोन के अत्यधिक इस्तेमाल के कथित नुकसान समझाने के लिए ऐसी गतिविधि कराई गई, जिसमें एक बच्चे की आंखों पर लाल रंग लगाकर पट्टी बांध दी गई. इसके बाद उसे अपने साथियों से यह कहने को कहा गया कि ज्यादा मोबाइल चलाने के कारण डॉक्टरों ने उसकी आंखें निकाल दी हैं. इस पूरी गतिविधि का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा. वीडियो में बच्चे अपने सहपाठी की बात सुनकर बुरी तरह डरते और रोते नजर आ रहे हैं. कुछ बच्चे हाथ जोड़कर यह कहते दिखाई देते हैं कि वे अब कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे. क्लासरूम में बच्चों के रोने और चीखने की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं.
बताया जा रहा है कि स्कूल की ओर से यह गतिविधि बच्चों को स्मार्टफोन, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कराई गई थी. हालांकि, बच्चों को डराने और मानसिक दबाव पैदा करने वाले इस तरीके को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
वायरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासन
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं. ऊधम सिंह नगर के जिला शिक्षा अधिकारी हरेंद्र कुमार मिश्रा ने संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. खटीमा के एसडीएम तुषार सैनी ने भी मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए इस तरह की डरावनी गतिविधियां कराना उचित नहीं है. उनके मुताबिक, बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए. स्कूल प्रबंधन को भी इस तरह की गतिविधियों से बचने के निर्देश दिए गए हैं. एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखने का उद्देश्य गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए अपनाया गया तरीका उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मोबाइल की लत के खिलाफ जागरूकता या बच्चों में डर?
स्मार्टफोन और ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता इस्तेमाल निश्चित तौर पर अभिभावकों और शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है. बच्चों को डिजिटल उपकरणों के संतुलित इस्तेमाल के लिए जागरूक करना जरूरी भी माना जाता है. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी गतिविधियां बच्चों की उम्र और भावनात्मक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए. खटीमा के इस मामले में अब जांच का केंद्र यही रहेगा कि स्कूल ने गतिविधि की योजना किस तरह बनाई, बच्चों को इसमें किस स्तर तक शामिल किया गया और क्या उनके भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी मानकों का पालन किया गया. फिलहाल प्रशासन की जांच पूरी होने का इंतजार है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में स्कूल प्रबंधन या संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं.