अफसरों की पत्नियों के साथ मेजर बनाता था अवैध संबंध.... पत्नी को लगी भनक तो कर दिया ऐसा खौफनाक कांड...
भारतीय सेना के एक मेजर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. चार महिलाओं के साथ कथित संबंध, नशाखोरी और परिवार की अनदेखी जैसे आरोपों के बाद सेना ने उन्हें सेवा से हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की है. अधिकारी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) का दरवाजा खटखटाया था.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारतीय सेना के एक मेजर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. चार महिलाओं के साथ कथित संबंध, नशाखोरी और परिवार की अनदेखी जैसे आरोपों के बाद सेना ने उन्हें सेवा से हटाने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की है. अधिकारी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, ट्रिब्यूनल ने फिलहाल उन्हें राहत देने और बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके साथ ही मेजर को निर्देश दिया गया है कि वे कारण बताओ नोटिस के जवाब में अपनी आपत्तियां और पक्ष प्रस्तुत करें. मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है. मेजर के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायत और जांच से जुड़े हैं. उनकी सेवा समाप्त करने को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
क्या है मामला
दरअसल इस मामले की शुरुआत अगस्त 2023 में हुई थी. उस समय मेजर की तत्कालीन पत्नी ने सेना मुख्यालय के अनुशासन एवं सतर्कता निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में अधिकारी पर कथित व्यभिचार, नशाखोरी और परिवार की उपेक्षा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि मेजर के चार महिलाओं के साथ संबंध थे. इनमें सेना में तैनात उनके साथी अधिकारियों की दो पत्नियां भी शामिल बताई गई थीं. शिकायत सामने आने के बाद सेना ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपों की जांच के लिए अक्टूबर 2023 में 55 (I) मैकेनाइज्ड ब्रिगेड मुख्यालय की ओर से कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई. इस जांच का उद्देश्य अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनसे संबंधित तथ्यों की पड़ताल करना था. जांच के बाद सेना ने मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया.
कोर्ट-मार्शल के बजाय अपनाई गई प्रशासनिक प्रक्रिया
सेना ने 10 अगस्त को आर्मी रूल्स के नियम 19 और 14 के तहत मेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसमें उनसे पूछा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में कोर्ट-मार्शल की प्रक्रिया व्यावहारिक नहीं होने के आधार पर उन्हें सेवा से क्यों न बर्खास्त कर दिया जाए. इस नोटिस के बाद अधिकारी ने प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच में याचिका दायर की. उन्होंने कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी.
मामले की सुनवाई जस्टिस राजेंद्र मेनन और लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती की पीठ ने की. पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि मेजर कारण बताओ नोटिस के जवाब में अपना पक्ष रख सकते हैं. यानी फिलहाल सेना की ओर से शुरू की गई प्रक्रिया जारी रहेगी.
जांच रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज देने का निर्देश
ट्रिब्यूनल ने अंतरिम राहत देने से इनकार करने के साथ सेना को एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया. पीठ ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि मेजर को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट और चार्ज हियरिंग की कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. बताया गया कि अधिकारी लंबे समय से इन रिकॉर्ड की मांग कर रहे थे. इन दस्तावेजों के मिलने से मेजर को अपने खिलाफ हुई जांच और आरोपों से संबंधित रिकॉर्ड देखने का अवसर मिलेगा. इसके आधार पर वे कारण बताओ नोटिस का जवाब तैयार कर सकेंगे और अपनी आपत्तियां संबंधित प्राधिकरण के समक्ष रख सकेंगे.
बर्खास्तगी पर अंतिम निर्णय का इंतजार
फिलहाल आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने मेजर को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है और सेना की प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक भी नहीं लगाई है. अब अधिकारी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा. इसके बाद सेना उनके जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे का निर्णय लेगी. मामले में अंतिम कार्रवाई अभी बाकी है. इसलिए मेजर की बर्खास्तगी को फिलहाल तय मानना उचित नहीं होगा. उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित प्राधिकरण के निर्णय और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.