TNP DESK: एक समय प्रीमियम फीचर्स को किफायती कीमत में उपलब्ध कराने वाली स्मार्टफोन कंपनी OnePlus को लेकर एक नई रिपोर्ट चर्चा में है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी आने वाले वर्षों में चीन के बाहर अपने कारोबार में बड़े बदलाव कर सकती है. इसमें अमेरिका, यूरोप और बाद में भारत जैसे बाजारों से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलने की बात कही गई है. हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इसलिए फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद यह खबर वनप्लस के मौजूदा और संभावित ग्राहकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
अमेरिका और यूरोप से शुरू हो सकती है प्रक्रिया
रिपोर्ट के अनुसार, वनप्लस की मूल कंपनी ओप्पो (Oppo) अपनी अंतरराष्ट्रीय रणनीति में बदलाव करने पर विचार कर रही है. इसी योजना के तहत सबसे पहले अमेरिका और यूरोप के बाजारों में वनप्लस की मौजूदगी कम की जा सकती है. कहा जा रहा है कि इन क्षेत्रों में बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, जिससे कंपनी अपने संसाधनों का पुनर्गठन करना चाहती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओप्पो अपने अन्य ब्रांड्स की रणनीति में भी बदलाव कर सकती है.

भारत में फिलहाल कारोबार जारी रहने की संभावना
भारत वनप्लस के सबसे अहम विदेशी बाजारों में से एक है. कंपनी की नॉर्ड (Nord) सीरीज और फ्लैगशिप स्मार्टफोन को यहां अच्छी पहचान मिली है. इसी वजह से रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से कंपनी की विदाई तुरंत नहीं होगी. दावा है कि यदि ऐसा कोई फैसला लिया जाता है तो यह चरणबद्ध तरीके से हो सकता है और 2027 तक कारोबार जारी रह सकता है. यानी फिलहाल भारतीय ग्राहकों के लिए कंपनी की बिक्री, सर्विस और नए उत्पादों की उपलब्धता में तत्काल किसी बदलाव की संभावना नहीं बताई जा रही है.
किन वजहों से सामने आई ऐसी चर्चा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में वनप्लस को कई बड़े बाजारों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी. वहीं दूसरी ओर ऐपल, सैमसंग, गूगल, हुआवेई और अन्य ब्रांड्स के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हुई है. इससे बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है.
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बदलते कारोबारी माहौल, चीनी कंपनियों पर बढ़ती निगरानी, विभिन्न देशों के नियम और कानूनी चुनौतियों को भी संभावित कारणों में शामिल किया गया है. रिपोर्ट में कुछ कानूनी विवादों का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि कंपनी ने इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

महंगी मेमोरी चिप और बढ़ती लागत भी बनी चुनौती
स्मार्टफोन उद्योग इस समय कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है. खासतौर पर मेमोरी चिप की लागत बढ़ने से बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन बनाना पहले की तुलना में महंगा हो गया है. वनप्लस की नॉर्ड सीरीज मुख्य रूप से इसी वर्ग के ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती रही है. ऐसे में बढ़ती लागत के कारण इस सेगमेंट में मुनाफा बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बनता जा रहा है.
मौजूदा ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
अगर भविष्य में वनप्लस किसी बाजार से बाहर निकलने का फैसला भी करती है, तो आमतौर पर कंपनियां मौजूदा ग्राहकों के लिए कुछ समय तक वारंटी, सर्विस सेंटर और सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाएं जारी रखती हैं. इसलिए अभी वनप्लस इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यह पूरी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. वनप्लस या ओप्पो की ओर से भारत, अमेरिका या यूरोप में कारोबार बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कंपनी के आधिकारिक बयान का इंतजार करना ही उचित होगा.

