109 करोड़ इंटरनेट यूजर्स से 66 करोड़ रोजाना UPI ट्रांजैक्शन तक, कैसे बना भारत डिजिटल इंडिया

भारत ने पिछले एक दशक में डिजिटल क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है. UPI, इंटरनेट, 5G, Aadhaar, जनधन और BharatNet ने देश की पेमेंट, कनेक्टिविटी और बैंकिंग व्यवस्था को तेजी से बदला है.

109 करोड़ इंटरनेट यूजर्स से 66 करोड़ रोजाना UPI ट्रांजैक्शन तक, कैसे बना भारत डिजिटल इंडिया

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारत ने बीते दस साल से डिजिटल क्षेत्र में तेज रफ्तार से बदलाव देखा है. आज ऑनलाइन पेमेंट से लेकर इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, आधार और बैंकिंग तक, डिजिटल सेवाएं आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या 100 करोड़ के पार जा चुकी है, 5G नेटवर्क लगभग पूरे देश के जिलों तक पहुंच चुका है और UPI हर दिन करोड़ों डिजिटल लेनदेन का जरिया बन गया है. आंकड़ों के जरिए समझिए कि डिजिटल इंडिया ने कितनी लंबी छलांग लगाई है.

UPI पर रोजाना करीब 66 करोड़ ट्रांजैक्शन

डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में UPI ने भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए. साल 2026 में रोजाना औसतन करीब 66 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए. यह आंकड़ा NPCI के डेटा पर आधारित है, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है.

ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट में भारत की बड़ी हिस्सेदारी

भारत का UPI सिस्टम अब सिर्फ घरेलू भुगतान तक सीमित नहीं है. सरकार के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनिया भर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन के कुल वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी थी. IMF की जून 2025 की रिपोर्ट में भी UPI को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया गया था.

इंटरनेट यूजर्स की संख्या 109 करोड़ के पार

भारत में इंटरनेट की पहुंच भी तेजी से बढ़ी है. मार्च 2026 तक देश में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या 109.27 करोड़ पहुंच गई थी. इसकी तुलना अगर मार्च 2014 से करें तो उस समय भारत में सिर्फ 25.15 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे. यानी 12 साल के दौरान इंटरनेट यूजर्स की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ.

एक दशक में इंटरनेट कनेक्शन में जबरदस्त उछाल

मार्च 2014 में जहां देश में 25.15 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे, वहीं मार्च 2026 में यह आंकड़ा 109.27 करोड़ हो गया. यानी करीब 12 वर्षों में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या लगभग 4.3 गुना बढ़ी. स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और सस्ते डेटा ने इस डिजिटल विस्तार को और गति दी.

करीब 99.9 फीसदी जिलों तक पहुंचा 5G

भारत में 5G नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से हुआ है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में देश के करीब 99.9 फीसदी जिलों में 5G सेवा उपलब्ध थी. इसकी आबादी कवरेज लगभग 85 फीसदी तक पहुंच चुकी थी. दूरसंचार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक देश में 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशनों की संख्या 5.08 लाख से ज्यादा हो गई थी.

 Aadhaar ने बनाया डिजिटल पहचान का मजबूत आधार

Aadhaar भी भारत के डिजिटल इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. मार्च 2026 तक देश में 144 करोड़ से ज्यादा Aadhaar नंबर जारी किए जा चुके थे. वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान Aadhaar आधारित authentication के 2,707 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए. इससे डिजिटल पहचान और विभिन्न सेवाओं तक पहुंच को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिला.

 जनधन खातों की संख्या 58 करोड़ के करीब

बैंकिंग को आम लोगों तक पहुंचाने में प्रधानमंत्री जनधन योजना की बड़ी भूमिका रही है. मार्च 2026 तक देश में जनधन खातों की संख्या 57.71 करोड़ थी. अप्रैल 2026 के सरकारी अपडेट में यह आंकड़ा बढ़कर 58.16 करोड़ बताया गया. वर्ष 2015 में ऐसे खातों की संख्या करीब 14.72 करोड़ थी. इस तरह एक दशक में वित्तीय समावेशन का दायरा काफी विस्तृत हुआ है.

 2.21 लाख ग्राम पंचायतें BharatNet से जुड़ने को तैयार

ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए BharatNet परियोजना पर भी तेजी से काम हुआ है. जून 2026 तक करीब 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को BharatNet के तहत सर्विस-रेडी बनाया जा चुका था. इसका उद्देश्य गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा पहुंचाना है.

11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI की पहुंच अब भारत की सीमाओं से बाहर भी बढ़ रही है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जुलाई 2026 तक UPI नेटवर्क से 741 बैंक जुड़े थे और यह प्रणाली 11 देशों में ऑपरेशनल थी. इनमें UAE, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव शामिल हैं.

जुलाई 2026 में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई 2026 में UPI पर 2,366 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए. उस समय तक यह किसी एक महीने में UPI ट्रांजैक्शन का सबसे बड़ा आंकड़ा था. इन डिजिटल भुगतानों की कुल वैल्यू करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रही. यह आंकड़ा बताता है कि भारत में डिजिटल पेमेंट अब रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर बड़े वित्तीय लेनदेन तक तेजी से अपनी जगह बना चुका है.

डिजिटल बदलाव की बड़ी तस्वीर

इन आंकड़ों को एक साथ देखें तो साफ है कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुआ है. UPI ने पेमेंट को आसान बनाया, Aadhaar ने डिजिटल पहचान को मजबूती दी, जनधन खातों ने बैंकिंग की पहुंच बढ़ाई, जबकि इंटरनेट, 5G और BharatNet ने कनेक्टिविटी का दायरा गांवों तक फैलाया. यही बदलाव डिजिटल भारत को एक बड़े और तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम में बदलने की तस्वीर पेश करते हैं.