सात्विक-चिराग के China Masters चैंपियन बनने की कहानी, जानिए कैसे पलटा मुश्किल फिनाले?
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने China Masters के फाइनल में चीन के हे जी टिंग और रेन शियांग यू को 11-21, 21-13, 21-17 से हराकर खिताब जीता. खास बात यह रही कि कभी सात्विक की कमजोरी मानी जाने वाली सर्विस निर्णायक गेम में उनका बड़ा हथियार बनी.
टिएनपी डेस्क (TNP DESK): भारत की स्टार बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने चीन मास्टर्स का खिताब जीतकर लंबे इंतजार को खत्म कर दिया. शेनझेन में खेले गए फाइनल में भारतीय जोड़ी ने चीन के हे जी टिंग और रेन शियांग यू को तीन गेम तक चले मुकाबले में 11-21, 21-13, 21-17 से हराया.
यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी की कहानी नहीं है. इसके पीछे सात्विक की उस कमजोरी पर महीनों की मेहनत भी है, जिसे विरोधी खिलाड़ी लगातार निशाना बना रहे थे. 2024 की शुरुआत से पेरिस ओलंपिक तक कई विरोधी जोड़ियों ने सात्विक की सर्विस और सर्विस रिटर्न पर तेज हमला करने की रणनीति अपनाई थी. इसका असर भारतीय जोड़ी के नतीजों पर भी पड़ा और उन्हें कई अहम मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा.
अब चीन मास्टर्स में तस्वीर बदली नजर आई. जिस सर्विस पर सात्विक कभी दबाव महसूस कर रहे थे, उसी से उन्होंने निर्णायक गेम में कई अहम अंक निकाले.

लगातार दो फाइनल हारने के बाद मिला खिताब
सात्विक और चिराग इससे पहले दो टूर फाइनल में जीत के करीब पहुंचकर खिताब से चूक गए थे. चीन मास्टर्स में उनका तीसरा प्रयास सफल रहा.
फाइनल की शुरुआत हालांकि भारतीय जोड़ी के लिए अच्छी नहीं रही. चीनी खिलाड़ियों ने तेज और आक्रामक खेल दिखाते हुए सात्विक-चिराग को शुरुआत से दबाव में रखा. पहला गेम भारतीय जोड़ी 11-21 से हार गई.
इसके बाद दोनों ने अपनी रणनीति बदली. दूसरे गेम में केवल ताकत के भरोसे खेलने के बजाय उन्होंने सोच-समझकर अटैक करना शुरू किया. इसका फायदा मिला और उन्होंने 21-13 से गेम जीतकर मुकाबला बराबर कर दिया.
सात्विक की सर्विस बनी निर्णायक हथियार
तीसरे गेम में मुकाबला बेहद करीबी रहा. एक समय स्कोर 17-17 था. यहां से सात्विक और चिराग ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और मैच 21-17 से अपने नाम कर लिया.
इस गेम में सात्विक ने नेट और सर्विस के जरिए पांच अहम अंक हासिल किए. सात्विक ने मैच के बाद बताया कि आमतौर पर इस तरह के मौकों पर चिराग ज्यादा अंक निकालते हैं, लेकिन इस बार उनकी सर्विस ने भी बड़ा फर्क पैदा किया.
सात्विक के मुताबिक, चोट के दौरान जब वह सामान्य तरीके से पूरा अभ्यास नहीं कर पा रहे थे, तब उन्होंने सर्विस और रिसीव पर काफी काम किया. विरोधी खिलाड़ी उनकी सर्विस को निशाना बनाते थे, इसलिए कोचिंग टीम ने वीडियो देखकर इस कमजोरी को समझा और उसे सुधारने पर काम किया.

कमजोरी से ज्यादा आत्मविश्वास की थी लड़ाई
सात्विक के लिए परेशानी केवल तकनीक की नहीं थी. लगातार यह जानना कि विरोधी आपकी एक कमजोरी को निशाना बनाने वाले हैं, मानसिक दबाव भी बढ़ाता है.
उन्होंने सर्विस की तकनीक सुधारने के साथ उस पर भरोसा करना भी सीखा. चीन मास्टर्स में इसका असर साफ दिखा. निर्णायक गेम के मुश्किल समय में भी सात्विक घबराए नहीं. चिराग भी लगातार उन्हें शांत रहने और मैच पर नियंत्रण बनाए रखने की बात कहते रहे.
पहले गेम में चीनी जोड़ी ने दिखाई जबरदस्त तेजी
फाइनल में चीन की जोड़ी ने हर गेम की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की. भारतीय जोड़ी शुरुआती गेमों में 0-5, 1-3 और 0-4 से पीछे हुई.
पहले गेम में सात्विक और चिराग विरोधियों की तेजी में फंस गए. चिराग के मुताबिक, भारतीय जोड़ी आक्रामक जरूर खेल रही थी, लेकिन सही शॉट नहीं चुन रही थी. दूसरे गेम में उन्होंने 'समझदारी वाली आक्रामकता' अपनाई.
सात्विक-चिराग ने सीधे अटैक करने शुरू किए और शटल की लंबाई पर बेहतर कंट्रोल बनाया. इससे लंबे चीनी खिलाड़ियों की मजबूत डिफेंस को तोड़ने में मदद मिली.

मुश्किल दौर के बाद सात्विक की बड़ी वापसी
पिछला समय सात्विक के लिए आसान नहीं रहा. निजी जिंदगी में माता-पिता में से एक को खोने का दुख, पेरिस ओलंपिक की निराशा, सोशल मीडिया पर आलोचना और कंधे की परेशानी जैसी कई चुनौतियों का उन्हें सामना करना पड़ा.
कंधे की समस्या के कारण उनकी मशहूर ताकतवर स्मैश पर भी असर पड़ा. लेकिन इसी दौर में उन्होंने अपने खेल के दूसरे हिस्सों पर ज्यादा मेहनत की.
चीन मास्टर्स का खिताब इसी बदलाव का नतीजा दिखाई दिया. चार तीन-गेम वाले मुकाबले जीतकर सात्विक और चिराग चैंपियन बने. सबसे अहम बात यह रही कि जिस सर्विस को कभी विरोधी उनकी कमजोरी मानकर निशाना बना रहे थे, उसी पर सात्विक ने भरोसा वापस हासिल किया. यह जीत ट्रॉफी के साथ उनके आत्मविश्वास की वापसी भी बन गई.