टेस्ट क्रिकेट में सफेद कपड़े और लाल गेंद ही क्यों? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

टेस्ट क्रिकेट में सफेद कपड़े और लाल गेंद ही क्यों? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): क्रिकेट में अलग-अलग फॉर्मेट के साथ गेंद और खिलाड़ियों की ड्रेस भी बदल गई है. टी-20 और वनडे में खिलाड़ी रंगीन जर्सी और सफेद गेंद के साथ मैदान पर उतरते हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट की पहचान आज भी सफेद कपड़े और लाल गेंद से जुड़ी हुई है. आखिर टेस्ट में सफेद कपड़े ही क्यों पहने जाते हैं और लाल गेंद का इस्तेमाल क्यों होता है. इसके पीछे क्रिकेट के पुराने दौर से जुड़ी दिलचस्प कहानी है.

जब क्रिकेट में नहीं होती थी रंगीन जर्सी

क्रिकेट का शुरुआती दौर आज के मुकाबले काफी अलग था. जब टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत हुई, तब खिलाड़ियों के लिए रंगीन जर्सी का चलन नहीं था. खिलाड़ी आमतौर पर सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनकर मैदान में उतरते थे.

उस समय क्रिकेट को लंबे समय तक चलने वाला खेल माना जाता था. टेस्ट मैच कई दिनों तक चलता था और खिलाड़ियों को पूरे दिन मैदान पर रहना पड़ता था. सफेद कपड़े गर्म मौसम में अपेक्षाकृत आरामदायक माने जाते थे और उस समय यही क्रिकेट की पारंपरिक ड्रेस बन गई.

धीरे-धीरे सफेद कपड़े टेस्ट क्रिकेट की पहचान बन गए. आज भी जब कोई खिलाड़ी सफेद ड्रेस में मैदान पर नजर आता है, तो तुरंत टेस्ट क्रिकेट का एहसास होता है.

लाल गेंद का इस्तेमाल क्यों होता है?

लाल गेंद इसलिए इस्तेमाल की जाती है क्योंकि यह मैदान पर आसानी से दिखाई देती है और लंबे समय तक चलती भी है. टेस्ट मैच कई दिनों तक चलता है. इस दौरान गेंद को लगातार इस्तेमाल किया जाता है. लाल गेंद को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह लंबे समय तक अपना आकार और चमक बनाए रख सके.

इसके अलावा सफेद कपड़ों के सामने लाल गेंद आसानी से दिखाई देती है. दिन के उजाले में लाल गेंद को बल्लेबाज और फील्डर दोनों आसानी से देख सकते हैं.

सफेद गेंद टेस्ट में क्यों नहीं?

सफेद गेंद का इस्तेमाल मुख्य रूप से सीमित ओवरों के क्रिकेट में किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह रात के मैच और रंगीन जर्सी हैं.

जब वनडे और टी-20 क्रिकेट में रंगीन कपड़े आए, तब सफेद गेंद का इस्तेमाल शुरू हुआ. रंगीन कपड़ों के सामने सफेद गेंद ज्यादा साफ दिखाई देती थी. लेकिन टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ी सफेद कपड़े पहनते हैं. ऐसे में सफेद गेंद मैदान और खिलाड़ियों के कपड़ों के साथ आसानी से मिल सकती है.

यही कारण है कि टेस्ट क्रिकेट में लाल गेंद और सफेद कपड़ों का संयोजन आज भी कायम है.

लाल गेंद सिर्फ रंग की वजह से खास नहीं

टेस्ट क्रिकेट की लाल गेंद सिर्फ अपने रंग की वजह से अलग नहीं होती. इसके निर्माण और इस्तेमाल का तरीका भी खास होता है. गेंद की सिलाई और उसकी सतह को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह लंबे समय तक गेंदबाजों को स्विंग और सीम कराने में मदद कर सके.

शुरुआत में गेंद चमकदार रहती है. गेंदबाज एक तरफ की सतह को चमकाने की कोशिश करते हैं. इससे गेंद को हवा में स्विंग कराने में मदद मिल सकती है. जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती जाती है, उसका व्यवहार भी बदलता है. पुरानी गेंद से तेज गेंदबाजों के साथ-साथ स्पिन गेंदबाजों को भी फायदा मिल सकता है.

यही बदलाव टेस्ट क्रिकेट को रणनीति के लिहाज से खास बनाता है.

लाल गेंद से बदलता रहता है मैच का खेल

टेस्ट क्रिकेट में गेंद की उम्र काफी महत्वपूर्ण होती है. नई गेंद तेज गेंदबाजों को स्विंग और सीम के जरिए बल्लेबाजों को परेशान करने का मौका देती है. कुछ समय बाद गेंद पुरानी होती है और उसका व्यवहार बदलने लगता है.

एक तय संख्या में ओवर पूरे होने के बाद गेंदबाजी टीम को नई गेंद लेने का विकल्प भी मिलता है. इससे मैच में एक नया मोड़ आ सकता है.

यानी टेस्ट क्रिकेट में लाल गेंद केवल गेंदबाजी का साधन नहीं है. गेंद की स्थिति पूरे मैच की रणनीति को प्रभावित कर सकती है.

डे-नाइट टेस्ट में भी लाल गेंद नहीं?

यहां एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला. डे-नाइट टेस्ट मैचों में खिलाड़ियों की ड्रेस तो सफेद ही रहती है, लेकिन लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जाता है.

इसकी वजह रात में रोशनी के नीचे गेंद को साफ दिखाई देना है. सफेद गेंद रात के समय खिलाड़ियों के लिए सही विकल्प नहीं मानी गई, जबकि पारंपरिक लाल गेंद भी कृत्रिम रोशनी में उतनी प्रभावी नहीं रहती. इसलिए गुलाबी गेंद को इस्तेमाल में लाया गया.

हालांकि डे-नाइट टेस्ट की संख्या अभी भी सामान्य दिन के टेस्ट मैचों की तुलना में कम है.

सफेद कपड़े और लाल गेंद बन गई टेस्ट की पहचान

आज क्रिकेट के तीनों प्रमुख फॉर्मेट की अपनी अलग पहचान है. टी-20 में रंगीन जर्सी और तेज खेल है. वनडे में भी रंगीन कपड़ों और सफेद गेंद का इस्तेमाल होता है. वहीं टेस्ट क्रिकेट में सफेद कपड़े और लाल गेंद इसकी पुरानी परंपरा को कायम रखते हैं.

टेस्ट क्रिकेट में पांच दिन तक चलने वाला मुकाबला, सफेद कपड़े, लाल गेंद और मैदान पर बदलती रणनीति इस फॉर्मेट को बाकी क्रिकेट से अलग बनाती है.

यही वजह है कि सफेद कपड़े और लाल गेंद आज सिर्फ क्रिकेट की जरूरत नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट की पहचान बन चुके हैं.