भारत में क्रिकेट का इतना क्रेज क्यों? जानिए अंग्रेजों का खेल कैसे बना देश की पहचान

भारत में क्रिकेट का इतना क्रेज क्यों? जानिए अंग्रेजों का खेल कैसे बना देश की पहचान

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है. यह करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है. कहीं बच्चे गली में बैट-बॉल लेकर खेलते दिखते हैं, तो कहीं बड़े मैच के दौरान पूरा परिवार टीवी के सामने बैठा नजर आता है. आज क्रिकेट भारतीय पहचान का हिस्सा बन चुका है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट भारत का अपना खेल नहीं था. इसे अंग्रेज भारत लेकर आए थे. समय के साथ भारतीयों ने इस खेल को अपनाया और फिर अपनी मेहनत, जुनून और उपलब्धियों से इसे नई पहचान दे दी.

अंग्रेज भारत में क्रिकेट लेकर आए

भारत में क्रिकेट खेले जाने का सबसे पुराना रिकॉर्ड 18वीं सदी की शुरुआत का मिलता है. माना जाता है कि 1721 में अंग्रेज नाविकों ने पश्चिमी तट के आसपास क्रिकेट खेला था. उस समय यह खेल मुख्य रूप से अंग्रेजों और यूरोपीय लोगों तक ही सीमित था.

धीरे-धीरे भारतीयों की इस खेल में रुचि बढ़ने लगी. 1792 में कलकत्ता क्रिकेट क्लब की स्थापना हुई. इसके बाद मुंबई, मद्रास और दूसरे बड़े शहरों में क्रिकेट क्लब बनने लगे. शुरुआत में भारतीयों के लिए इस खेल में जगह बनाना आसान नहीं था, लेकिन कुछ समुदायों ने इसे तेजी से अपनाया.

रणजीतसिंहजी ने बढ़ाया भारतीयों का आत्मविश्वास

भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में महाराजा रणजीतसिंहजी का नाम बेहद खास रहा. उन्होंने इंग्लैंड की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेला और अपनी शानदार बल्लेबाजी से पहचान बनाई.

उनकी सफलता ने भारतीयों को यह भरोसा दिया कि क्रिकेट में भारतीय खिलाड़ी भी दुनिया के बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकते हैं. बाद में उनके सम्मान में भारत की घरेलू प्रथम श्रेणी प्रतियोगिता का नाम रणजी ट्रॉफी रखा गया.

1928 में BCCI की शुरुआत

भारतीय क्रिकेट को संगठित रूप देने के लिए 1928 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI की स्थापना हुई. इसके बाद भारतीय क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का रास्ता मिला.

भारत ने 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में अपना पहला टेस्ट मैच खेला. सीके नायडू उस टीम के कप्तान थे. भारत को टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहचान मजबूत करने में लंबा समय लगा, लेकिन धीरे-धीरे टीम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगे बढ़ने लगी.

आजादी के बाद क्रिकेट बना राष्ट्रीय जुनून

1947 में देश आजाद हुआ. इसके बाद क्रिकेट को देखने का नजरिया भी बदलने लगा. अब मैदान पर भारतीय खिलाड़ी किसी विदेशी टीम के खिलाफ अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

1952 में भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच जीता. इसके बाद कई खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को मजबूत किया. 1970 के दशक में सुनील गावस्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ और बिशन सिंह बेदी जैसे खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी.

1971 में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीत भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई. इससे भारतीय टीम को विदेशी धरती पर भी मजबूत माना जाने लगा.

1983 ने बदल दी क्रिकेट की तस्वीर

अगर भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता का सबसे बड़ा मोड़ पूछा जाए तो 1983 का नाम सबसे पहले आएगा.

कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड में आयोजित वनडे वर्ल्ड कप जीत लिया. फाइनल में भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप अपने नाम किया.

इस जीत ने क्रिकेट को देश के घर-घर तक पहुंचा दिया. बच्चों में क्रिकेटर बनने का सपना बढ़ा. छोटे शहरों और कस्बों में क्रिकेट खेलने वाले युवाओं को लगा कि वे भी एक दिन भारतीय टीम का हिस्सा बन सकते हैं.

2007 के बाद बदल गया क्रिकेट का अंदाज

2007 में T20 वर्ल्ड कप के आयोजन ने क्रिकेट को एक नया रूप दिया. छोटे फॉर्मेट ने दर्शकों को तेजी से आकर्षित किया. भारत ने पहले ही T20 वर्ल्ड कप में खिताब जीतकर इस फॉर्मेट की लोकप्रियता को और बढ़ा दिया.

इसके एक साल बाद 2008 में IPL की शुरुआत हुई. IPL ने भारतीय क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया. अलग-अलग शहरों की टीमें बनीं और भारतीय खिलाड़ियों के साथ दुनिया के बड़े क्रिकेटर एक ही लीग में खेलने लगे.

IPL ने खिलाड़ियों के लिए कम उम्र में बड़े मंच तक पहुंचने का रास्ता खोला. साथ ही क्रिकेट को मनोरंजन, ग्लैमर और बिजनेस से भी जोड़ दिया.

महिला क्रिकेट ने भी बनाई मजबूत पहचान

भारत में क्रिकेट का क्रेज अब सिर्फ पुरुष क्रिकेट तक सीमित नहीं है. महिला क्रिकेट की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ी है.

भारतीय महिला टीम ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है. स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर, मिताली राज और झूलन गोस्वामी जैसी खिलाड़ियों ने देश में महिला क्रिकेट को नई पहचान दी.

2023 में WPL की शुरुआत के बाद महिला क्रिकेट को एक बड़ा घरेलू मंच मिला. इससे युवा लड़कियों के लिए क्रिकेट में करियर बनाने के अवसर भी बढ़े.

क्रिकेट इतना लोकप्रिय क्यों है?

भारत में क्रिकेट के जुनून के पीछे कई कारण हैं. इसका इतिहास काफी पुराना है. आजादी के बाद क्रिकेट राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा. 1983 की विश्व कप जीत ने इसे घर-घर पहुंचाया. सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों ने इसे भावनाओं से जोड़ा और IPL ने इसे नई पीढ़ी के बीच और लोकप्रिय बनाया.

सबसे बड़ी बात यह है कि क्रिकेट खेलने के लिए महंगे मैदान की जरूरत नहीं होती. गली, स्कूल का मैदान या पार्क. कहीं भी बच्चे बैट-बॉल लेकर खेलना शुरू कर देते हैं.

यही वजह है कि अंग्रेजों के दौर में भारत आया क्रिकेट आज पूरी तरह भारतीय हो चुका है. कभी यह विदेशी शासन के साथ आया था, लेकिन आज करोड़ों भारतीयों के लिए यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जुनून, यादें, उम्मीद और देश के गौरव का हिस्सा बन चुका है.