खिताब से एक जीत दूर Team India, फाइनल में ये 3 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

भारतीय महिला टीम एशिया कप के फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब से सिर्फ एक जीत दूर है. गेंदबाजी टीम की सबसे बड़ी ताकत रही है, लेकिन फाइनल जीतने के लिए मिडिल ऑर्डर, फील्डिंग और डेथ ओवर्स में गलतियों से बचना होगा.

खिताब से एक जीत दूर Team India, फाइनल में ये 3 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

टिएनपी डेस्क(TNP DESK): भारतीय महिला टीम एशिया कप के फाइनल तक पहुंच चुकी है. अब टीम खिताब से सिर्फ एक जीत दूर है. पूरे टूर्नामेंट में भारत ने कई मौकों पर दिखाया है कि उसके पास बड़े मैच जीतने का दम है. गेंदबाजी टीम की बड़ी ताकत बनकर सामने आई है, जबकि बल्लेबाजी में भी कई शानदार पारियां देखने को मिली हैं. इसके बावजूद फाइनल से पहले कुछ ऐसी कमियां हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी होगा. क्योंकि खिताबी मुकाबले में एक छोटी गलती भी पूरे मैच का रुख बदल सकती है.

फाइनल में भारत के लिए सबसे जरूरी होगा कि बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों में एक साथ अच्छा प्रदर्शन किया जाए. अब तक टीम किसी एक खिलाड़ी के भरोसे नहीं रही है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है.

बल्लेबाजी में अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलना होगा

भारत के पास मजबूत टॉप ऑर्डर है. शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना जैसी बल्लेबाज शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने की क्षमता रखती हैं. शेफाली का आक्रामक अंदाज पावरप्ले में भारत को तेजी से रन दिला सकता है, वहीं स्मृति जरूरत के हिसाब से पारी को संभालने के साथ तेजी से रन भी बना सकती हैं.

लेकिन फाइनल में सिर्फ अच्छी शुरुआत काफी नहीं होगी. अगर किसी बल्लेबाज की नजर जम जाती है तो उसे अपनी पारी को लंबा खींचना होगा. 25-30 रन बनाकर विकेट गंवाने के बजाय किसी एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज को आखिर तक टिककर बड़ी पारी खेलने की कोशिश करनी होगी.

भारत को सबसे ज्यादा सुधार मिडिल ऑर्डर में करना होगा. कई बार अच्छी शुरुआत के बाद बीच के ओवरों में रन बनाने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. फाइनल में ऐसा हुआ तो विरोधी टीम मैच में वापसी कर सकती है. हरमनप्रीत कौर और ऋचा घोष जैसे बल्लेबाजों की भूमिका यहां काफी अहम होगी.

गेंदबाजी भारत की सबसे मजबूत कड़ी

अगर भारत की सबसे बड़ी ताकत की बात करें तो गेंदबाजी फिलहाल सबसे आगे नजर आती है. टीम के पास तेज गेंदबाजी और स्पिन दोनों में अच्छे विकल्प हैं. खासकर बीच के ओवरों में भारतीय स्पिन गेंदबाज विरोधी बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं देते.

दीप्ति शर्मा जैसी अनुभवी खिलाड़ी गेंद के साथ मैच का रुख बदलने की क्षमता रखती हैं. वह सिर्फ विकेट ही नहीं निकालतीं, बल्कि रन रोककर बल्लेबाजों पर दबाव भी बनाती हैं.

फाइनल में भारत को शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की कोशिश करनी होगी. अगर विरोधी टीम के दो-तीन मेन बल्लेबाज जल्दी आउट हो जाते हैं तो भारतीय गेंदबाज मैच पर पकड़ बना सकते हैं. डेथ ओवरों में भी लाइन और लेंथ पर खास ध्यान देना होगा, क्योंकि आखिरी चार-पांच ओवर में ज्यादा रन देना भारी पड़ सकता है.

फील्डिंग में गलती की गुंजाइश नहीं

फाइनल में भारत को फील्डिंग के मामले में भी पूरी तरह सतर्क रहना होगा. बड़े मुकाबले अक्सर एक कैच, रन आउट या बाउंड्री बचाने से पलट जाते हैं. ऐसे में आसान कैच छोड़ने की गलती से बचना होगा.

खासकर बाउंड्री पर खड़े फील्डर्स की जिम्मेदारी ज्यादा होगी. दो रन को एक में बदलना और चौके को रोकना भी आखिर में मैच के नतीजे पर असर डाल सकता है.

दबाव को संभालना भी होगा जरूरी

फाइनल का दबाव आम मुकाबलों से अलग होता है. ऐसे में भारतीय टीम को बहुत ज्यादा प्रयोग करने के बजाय अपने मजबूत खेल पर भरोसा करना चाहिए. शुरुआत खराब भी होती है तो घबराने के बजाय मैच में वापसी का रास्ता तलाशना होगा.

कुल मिलाकर भारतीय टीम के पास खिताब जीतने के लिए मजबूत गेंदबाजी, अनुभवी खिलाड़ी और आक्रामक बल्लेबाज मौजूद हैं. गेंदबाजी उसकी सबसे मजबूत कड़ी नजर आ रही है, जबकि मिडिल ऑर्डर की बल्लेबाजी और फील्डिंग में थोड़े सुधार की जरूरत है.

फाइनल में अगर भारत अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलता है, बीच के ओवरों में रन की रफ्तार बनाए रखता है और गेंदबाजी में अपना मौजूदा प्रदर्शन दोहराता है तो खिताब जीतने की राह काफी आसान हो सकती है. अब जरूरत सिर्फ इस बात की है कि बड़े मुकाबले में पूरी टीम एक साथ अपना सबसे अच्छा खेल दिखाए.