दिल्ली का विराट कैसे बना क्रिकेट का किंग कोहली? पढ़िए संघर्ष से शिखर तक की पूरी कहानी

दिल्ली का विराट कैसे बना क्रिकेट का किंग कोहली? पढ़िए संघर्ष से शिखर तक की पूरी कहानी

टिएनपी डेस्क(TNP DESK): दिल्ली से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले विराट कोहली का सफर मेहनत, जुनून और कई बड़ी उपलब्धियों से भरा रहा है. छोटी उम्र में क्रिकेट शुरू करने वाला यह लड़का आगे चलकर दुनिया के सबसे बड़े बल्लेबाजों में शामिल हुआ. रिकॉर्ड, शतक, कप्तानी, फिटनेस और बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें 'किंग कोहली' की पहचान दी.

9 साल की उम्र में शुरू हुआ क्रिकेट

विराट कोहली का क्रिकेट सफर करीब 9 साल की उम्र में शुरू हुआ. उनके पिता उन्हें वेस्ट दिल्ली क्रिकेट अकादमी लेकर गए, जहां कोच राजकुमार शर्मा ने उनकी प्रतिभा को निखारा. इसके बाद विराट ने दिल्ली की जूनियर क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और जल्द ही भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सितारे के तौर पर पहचाने जाने लगे.

अंडर-19 वर्ल्ड कप से मिली पहचान

2008 में विराट को पहली बड़ी सफलता मिली. उन्होंने भारतीय अंडर-19 टीम की कप्तानी की और मलेशिया में हुए वर्ल्ड कप में भारत को चैंपियन बनाया. टूर्नामेंट में विराट ने 235 रन बनाए. इसी साल उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया.

शुरुआती दौर में उन्हें टीम में जगह पक्की करने के लिए संघर्ष करना पड़ा, लेकिन कुछ ही समय में वह भारत के भरोसेमंद बल्लेबाज बन गए.

2011 वर्ल्ड कप ने बनाया स्टार

2011 का वनडे वर्ल्ड कप विराट के करियर का बड़ा मोड़ था. भारत ने 28 साल बाद वर्ल्ड कप जीता और विराट इस टीम का हिस्सा थे. उन्होंने टूर्नामेंट के पहले मैच में शतक लगाया. फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने 35 रन बनाए और भारत की जीत में अहम योगदान दिया.

इसके बाद विराट की पहचान एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में बनने लगी, जो बड़े मंच पर दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है.

'चेज मास्टर' से दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाजों तक

लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट की बल्लेबाजी ने उन्हें अलग पहचान दी. मुश्किल लक्ष्य हो या दबाव वाला मुकाबला, वह आखिरी तक टिककर टीम को जीत दिलाने के लिए जाने गए. इसी वजह से उन्हें 'चेज मास्टर' कहा गया.

2012 में उन्हें ICC ODI Player of the Year चुना गया. इसके बाद उन्होंने वनडे क्रिकेट में लगातार रन बनाए और कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए.

टेस्ट कप्तानी और ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत

2011 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद विराट ने धीरे-धीरे इस फॉर्मेट में भी अपनी जगह मजबूत की. 2014 में उन्हें टेस्ट टीम की कप्तानी मिली. कप्तान बनने के बाद उन्होंने भारतीय टीम की फिटनेस और आक्रामक क्रिकेट पर खास जोर दिया.

उनकी कप्तानी में भारत ने कई बड़ी विदेशी जीत हासिल कीं. 2018-19 में भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रचा. विराट भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में शामिल हुए.

खराब दौर में भी नहीं मानी हार

2020 से 2022 के बीच विराट के करियर में मुश्किल दौर आया. लंबे समय तक उनके बल्ले से अंतरराष्ट्रीय शतक नहीं आया और उनकी फॉर्म पर सवाल उठने लगे.

लेकिन 2022 एशिया कप में उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ T20I शतक लगाकर शानदार वापसी की. उसी साल टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी 82 रन की नाबाद पारी ने एक बार फिर उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मैच विनर्स में शामिल कर दिया.

2023 वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड की बारिश

2023 वनडे वर्ल्ड कप विराट के करियर की सबसे शानदार प्रतियोगिताओं में से एक रहा. उन्होंने 765 रन बनाए और टूर्नामेंट में अपना 50वां वनडे शतक पूरा किया. इस शतक के साथ उन्होंने सचिन तेंदुलकर के 49 वनडे शतकों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया.

विराट को Player of the Tournament चुना गया. हालांकि भारत फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गया, लेकिन विराट का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रहा.

2024 T20 वर्ल्ड कप में मिली ट्रॉफी

2024 T20 वर्ल्ड कप के फाइनल में विराट ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन की शानदार पारी खेली. भारत ने यह मुकाबला जीतकर 11 साल बाद ICC ट्रॉफी अपने नाम की. इसके बाद विराट ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

उनके करियर में अर्जुन अवॉर्ड, पद्म श्री और राजीव गांधी खेल रत्न जैसे बड़े सम्मान भी शामिल हैं. वह कई बार ICC के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर और वनडे क्रिकेटर का पुरस्कार जीत चुके हैं.

दिल्ली की क्रिकेट अकादमी से शुरू हुआ विराट का सफर आज एक ऐसी कहानी बन चुका है, जिसमें रिकॉर्ड भी हैं, मुश्किल दौर भी और वर्ल्ड कप की यादगार जीत भी. यही सफर उन्हें सिर्फ एक महान बल्लेबाज नहीं, बल्कि क्रिकेट की दुनिया का 'किंग कोहली' बनाता है.