धनतेरस के दिन क्यों जलाते है यम का दिया, जानिए क्या है इसके पीछे की परंपरा
आज धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन, धनिया, नमक, हल्दी और झाड़ू खरीदने की परंपरा है. कारोबारी भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर नए काम की शुरुआत करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस की शाम यमराज के नाम से एक दीपक भी जलाया जाता है?
टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज 6 नवंबर 2026 को देशभर में धनतेरस मनाया जा रहा है. आज धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन, धनिया, नमक, हल्दी और झाड़ू खरीदने की परंपरा है. कारोबारी भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर नए काम की शुरुआत करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस की शाम यमराज के नाम से एक दीपक भी जलाया जाता है? आखिर इस दीपक को जलाने के पीछे क्या मान्यता है और इसे जलाने का सही तरीका क्या है?

दरअसल, दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है. इस दिन बाजारों में रौनक देखने को मिलती है. लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना-चांदी और बर्तनों की खरीदारी करते हैं. वहीं, कई घरों में धनिया, नमक, हल्दी और झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है. व्यापारियों के लिए भी यह दिन खास होता है. कई कारोबारी अपने प्रतिष्ठानों में भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा कर सुख-समृद्धि और कारोबार में तरक्की की कामना करते हैं. लेकिन खरीदारी और पूजा-पाठ के बीच धनतेरस की शाम एक और खास परंपरा निभाई जाती है, जिसे यम दीपदान या यम का दीपक कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमराज के नाम से दीपक जलाने से परिवार पर अकाल मृत्यु का संकट टलता है और घर के सदस्यों की लंबी आयु की कामना पूरी होती है.
क्यों जलाया जाता है यम का दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है. माना जाता है कि इस दीपक को जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से रक्षा मिलती है. यही वजह है कि इसे यम दीपक भी कहा जाता है. यह परंपरा परिवार की सुख-शांति और लंबी आयु की कामना से जुड़ी है.

यम का दीपक जलाने का सही तरीका
मान्यता के अनुसार, यम का दीपक जलाने के लिए सरसों या तिल के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. इसे घर के अंदर नहीं, बल्कि मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है. दीपक रखने से पहले उसके नीचे थोड़े साबुत चावल रखने की परंपरा है. इसके बाद यमराज का स्मरण करते हुए दीपक जलाना चाहिए. धार्मिक मान्यता यह भी है कि दीपक जलाने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. हालांकि, इन परंपराओं को आस्था और धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाता है.

महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी है शुभ
अगर किसी व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय सताता है या वह परिवार की लंबी आयु और सुख-शांति की कामना करता है तो भगवान शिव की आराधना कर सकता है. धनतेरस के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे मन का भय और नकारात्मकता दूर होती है. इस तरह धनतेरस सिर्फ खरीदारी और धन-समृद्धि का त्योहार नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और मंगलकामना से जुड़ा पर्व भी है.