Navratri Day 9: नवरात्रि के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की होगी पूजा, जानिए सिद्धि, मोक्ष और पूजा विधि
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. जानें महानवमी 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और माता को चढ़ाए जाने वाले भोग के बारे में.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): शारदीय नवरात्रि का आज नौवां दिन है. इसे महानवमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. महानवमी को देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन भक्त उपवास रखकर माता की आराधना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. पंडित जगदीश शर्मा के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा करने से यश, बल और धन की प्राप्ति होती है.
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी माना जाता है. माता का वाहन सिंह है और उनकी चार भुजाएं हैं. उनके दाहिने हाथों में चक्र और गदा, जबकि बाएं हाथों में कमल का फूल और शंख सुशोभित हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की आराधना से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और जीवन में सफलता का आशीर्वाद मिलता है.
महानवमी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की महानवमी 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, नवमी तिथि की शुरुआत 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर होगा. मां सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 44 मिनट से 11 बजकर 32 मिनट तक बताया गया है. अलग-अलग पंचांगों में तिथि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा.
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
महानवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें और मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. माता को गंगाजल और दूध से स्नान कराने के बाद चंदन, अक्षत, धूप, दीप और लाल फूल अर्पित करें. मां को कमल और गुड़हल के फूल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.
पूजा के दौरान मां सिद्धिदात्री के मंत्र 'ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः' का श्रद्धापूर्वक जाप करें. इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार हवन कर माता की आरती उतारें और सुख-शांति की प्रार्थना करें. महानवमी पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है. इस दिन नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है. कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोजन कराकर सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं.
मां सिद्धिदात्री को क्या चढ़ाएं?
मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी, काले तिल, चने, खीर, नारियल और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान का भोग लगाया जाता है. नवरात्रि के अंतिम दिन फल, फूल और प्रसाद अर्पित कर नौ दिनों की पूजा का समापन किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता की पूजा के दौरान जामुनी या बैंगनी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. महानवमी का दिन श्रद्धा, भक्ति और साधना के लिए विशेष माना जाता है. भक्त मां सिद्धिदात्री से सुख, समृद्धि, शांति और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.