नहाय -खाय के साथ आज से जितिया व्रत की शुरुआत, जानें पूजा विधि और व्रत के नियम
Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला जितिया व्रत आज 2 अक्टूबर 2026 से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है.
Jitiya Vrat 2026: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला जितिया व्रत आज 2 अक्टूबर 2026 से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है.
TNP DESK- संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला जितिया व्रत आज 2 अक्टूबर 2026 से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है.बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई क्षेत्रों में महिलाएं इस पर्व को श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाती हैं. जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है.
आज नहाय-खाय से हुई शुरुआत
जितिया व्रत के पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है. व्रती महिलाएं स्नान कर पूजा-अर्चना के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं.इसके बाद अगले दिन मुख्य व्रत के लिए संकल्प लिया जाता है.
बिहार में नहाय-खाय के खाने में आज मड़ुआ की रोटी, कद्दू की सब्जी और नोनी का साग खाने की परंपरा है.
3 अक्टूबर को निर्जला जितिया व्रत
3 अक्टूबर 2026 को जितिया का निर्जला व्रत रखा जाएगा. इस दिन व्रती महिलाएं परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत रखती हैं. भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर संतान की दीर्घायु और मंगल की कामना की जाती है.
पूजा के दौरान जीमूतवाहन की कथा के साथ चील और सियारिन की कथा सुनने की भी परंपरा है.
जितिया पूजन सामग्री
पूजा के लिए सामान्य तौर पर जीमूतवाहन की प्रतिमा, कुश, गोबर, रोली या सिंदूर, अक्षत, फूल, धूप, दीप, कपूर, फल, मिठाई, पान-सुपारी और पूजा के अन्य सामान रखे जाते हैं. जिउतिया का धागा भी पूजा में रखा जाता है.
व्रत के प्रमुख नियम
नहाय-खाय के बाद व्रत की तैयारी शुरू की जाती है.
मुख्य व्रत के दिन परंपरा के अनुसार निर्जला उपवास रखा जाता है
पूजा में भगवान जीमूतवाहन का स्मरण और कथा सुना जाता है
4 अक्टूबर को होगा पारण
जितिया व्रत के बाद 4 अक्टूबर को पारण किया जाएगा.