क्या सचमुच आज भी बेड़ियों में कैद हैं हनुमानजी ? जानिए जगन्नाथ पुरी के रहस्यमयी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

क्या सचमुच आज भी बेड़ियों में कैद हैं हनुमानजी ? जानिए जगन्नाथ पुरी के रहस्यमयी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):आज पूरे देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली जा रही है. खासकर ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का भव्य आयोजन होता है. ओडिशा का भगवान जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक माना जाता है, जहां भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं . इस मंदिर के पास ही विशाल समुद्र है.आज हम आपको पुरी में स्थित एक ऐसे हनुमान मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आज भी हनुमान जी को बेड़ी में कैद माना जाता है.इस मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा बेहद रोचक है.आइए जानते हैं कि आखिर क्यों भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी को यहां बेड़ी में बांध दिया.

 जानिए जगन्नाथ पुरी के रहस्यमयी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है. इस मंदिर से लेकर मूर्तियों के निर्माण और यहां की कई परंपराओं से जुड़ी एक-एक बात रहस्यमयी मानी जाती है.चाहे मंदिर के ऊपर लहराता ध्वज हो या मंदिर की परछाई, यहां के कई रहस्य लोगों को आकर्षित करते हैं. इन्हीं रहस्यों में से एक यहां स्थित हनुमान मंदिर भी है.ऐसा माना जाता है कि मालवा के राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ के आदेश पर इस मंदिर का निर्माण कराया था. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने उन्हें सपने में दर्शन देकर मंदिर बनवाने का आदेश दिया था.चूंकि यह मंदिर समुद्र के किनारे बना है, इसलिए समुद्र की ऊंची लहरें बार-बार मंदिर को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती थी.

आज भी बेड़ियों में कैद है हनुमानजी

इसके बाद मंदिर की रक्षा के लिए हनुमान जी को नियुक्त किया गया. लेकिन समुद्र के पास होने की वजह से जब भी हनुमान जी के कानों में भगवान राम का नाम गूंजता, तो वे पहरेदारी छोड़कर राम नाम सुनने चले जाते थे. उनकी अनुपस्थिति में समुद्र की लहरें आसपास के गांवों और बस्तियों में प्रवेश कर जाती थीं, जिससे घरों को नुकसान पहुंचता था. बार-बार ऐसा होने पर भगवान जगन्नाथ ने इसका एक उपाय निकाला.

पढ़िये हनुमान जी के साथ भगवान जगन्नाथ ने ऐसा क्यों किया

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने समुद्र की लहरों पर पहरा देने के लिए हनुमान जी को बेड़ियों में बांध दिया, ताकि वे किसी भी कारण से अपनी ड्यूटी छोड़कर कहीं न जा सकें.तभी से हनुमान जी यहीं विराजमान है. बेड़ियों में बंधे होने की वजह से इस मंदिर का नाम बेड़ी हनुमान मंदिर पड़ा.मान्यता है कि हनुमान जी आज भी समुद्र की लहरों से इस क्षेत्र की रक्षा कर रहे है.भगवान जगन्नाथ के आदेश का पालन करते हुए वे आज भी पुरी के जगन्नाथ मंदिर के सामने स्थित इस मंदिर में विराजमान हैं और आसपास की बस्तियों व गांवों की रक्षा करते है.