टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड और बंगाल से सटे रामपुरहाट अचानक चर्चे में आ गया है. क्यों आया है इसकी एक दुखद कहानी है. 2001 से 2006 तक लगातार रामपुरहाट से विधायक रहे आशीष बनर्जी आखिर क्यों इतने टूट गए कि उन्हें कथित तौर पर आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ा? उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेवार नहीं बताया है. वह ममता बनर्जी सरकार में डिप्टी स्पीकर के पद पर रह चुके हैं. उनका शव टीएमसी कार्यालय में लटका मिला है. आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है.
क्यों लिखा- राजनीति में आकर गलत किया
उनकी लाश के पास एक पत्र भी बरामद हुआ है. उसमें उन्होंने किसी को जिम्मेवार नहीं बताया है. लेकिन यह बात जरूर लिखी हुई है कि वह राजनीति में आकर गलत किया. अपने परिवार के सदस्यों को भी सलाह दी है कि भविष्य में कभी राजनीति में ना आये. वह अपने पेशे पर फोकस करें. उन्होंने पत्र में लिखा है कि उनके पास तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी में कोई अधिकार नहीं था. फिर भी इस मामले में मुझे घसीटने की कोशिश हुई. मैंने शायद राजनीति में आकर ही गलती की थी. आगे लिखा है कि मेरे पास रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी से सीधे तौर पर कोई जिम्मेवारी और अधिकार नहीं थे. मैं सिर्फ बैठक में जाया करता था. मैं टेंडर कमेटी में भी नहीं था. मेरे पास साइन चेक करने के अधिकार भी नहीं थे. मैं किसी प्लान को मंजूरी देने में भी शामिल नहीं था.
सुसाइड नोट, राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा
फिर लिखा है कि आज मुझे लगता है की राजनीति में आकर मैंने गलती की थी. मैं अपने परिवार के युवा पीढ़ी को सलाह दूंगा कि वह कभी राजनीति में ना आये. अपने ही पेशे पर फोकस करे. आशीष बनर्जी टीएमसी के एक कद्दावर नेता थे और पेशे से शिक्षक रहे थे. 2001 से 2026 तक रामपुरहाट विधानसभा सीट से विधायक रहे थे. वह ममता बनर्जी की कैबिनेट में भी रहे थे. पूर्व विधायक की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है. परिवार का कहना है कि पहले से कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. वे रात तक बिल्कुल सामान्य थे. परिवार को समझ नहीं आ रहा कि अचानक क्या हुआ. हालांकि, पूर्व मंत्री के शव के पास से बरामद सुसाइड नोट पर काफी चर्चा शुरू हो गई है. सुसाइड नोट राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है.

