बारिश में दीवारों पर क्यों जमने लगती है फंगस? घर की सीलन से सेहत पर क्या पड़ता है असर
बारिश में घर की दीवारों पर फंगस और सीलन क्यों जमती है? जानें इसके कारण, सेहत पर असर और घर को नमी से बचाने के आसान उपाय.
बारिश में घर की दीवारों पर फंगस और सीलन क्यों जमती है? जानें इसके कारण, सेहत पर असर और घर को नमी से बचाने के आसान उपाय.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): मॉनसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है लेकिन साथ ही साथ कई परेशानियाँ भी साथ लेकर आती है. बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान घरों में सीलन और नमी की समस्या बढ़ जाती है. दीवारों, छत, खिड़कियों के आसपास और फर्नीचर के पीछे काले, हरे या सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं. इन्हें आम भाषा में फंगस या फफूंद कहा जाता है. शुरुआत में लोग इसे केवल घर की सुंदरता खराब करने वाली समस्या मानते हैं, लेकिन लंबे समय तक फंगस के संपर्क में रहने से सेहत पर भी असर पड़ सकता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों, एलर्जी और अस्थमा से परेशान लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

बारिश में दीवारों पर फंगस क्यों जमती है?
फंगस के पनपने के लिए नमी, गर्मी और हवा में मौजूद छोटे-छोटे जैविक कण पर्याप्त होते हैं. बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है. घर की दीवारों में पानी का रिसाव, छत से सीपेज, पाइपलाइन की खराबी या कमरे में हवा का सही तरीके से न आना इस समस्या को और बढ़ा देता है. जब दीवार लंबे समय तक गीली रहती है, तो फंगस के बीजाणु वहां चिपककर तेजी से बढ़ने लगते हैं.
कमरे में कपड़े सुखाने, गीले कपड़े या जूते रखने और खिड़कियां बंद रखने से भी नमी बढ़ सकती है. कई बार अलमारी, सोफा या बेड दीवार से बिल्कुल सटाकर रखने पर पीछे हवा नहीं पहुंचती और वहां फंगस जमने लगती है. बाथरूम और रसोई की दीवारों पर यह समस्या अधिक देखने को मिलती है.

सीलन और फंगस से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?
फंगस के छोटे-छोटे कण हवा में मिलकर सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं. इससे कुछ लोगों को छींक, नाक बंद होना, गले में खराश, आंखों में जलन, खांसी और त्वचा पर खुजली जैसी परेशानी हो सकती है. जिन लोगों को पहले से अस्थमा या धूल-मिट्टी से एलर्जी है, उनकी समस्या बढ़ सकती है. कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न भी महसूस हो सकती है.
फंगस की तेज गंध से सिरदर्द या बेचैनी भी हो सकती है. हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता. अगर घर में रहने के बाद बार-बार खांसी, सांस फूलना या एलर्जी के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
घर की सीलन दूर करने के आसान उपाय
सबसे जरूरी है कि दीवार में पानी के रिसाव की वजह का पता लगाकर उसे ठीक कराया जाए. छत, पाइपलाइन और खिड़कियों के आसपास की दरारों की जांच करें. कमरे की खिड़कियां और दरवाजे कुछ समय के लिए खोलकर हवा का आवागमन बनाए रखें. जरूरत पड़ने पर एग्जॉस्ट फैन या डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
फंगस लगी दीवार को सूखे कपड़े से रगड़ने के बजाय मास्क और दस्ताने पहनकर साफ करें. छोटे हिस्से को उचित क्लीनिंग सॉल्यूशन से साफ किया जा सकता है, लेकिन बड़ी मात्रा में फंगस होने पर विशेषज्ञ की मदद लेना सुरक्षित रहता है. सफाई के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और एलर्जी वाले लोगों को उस कमरे से दूर रखें. फंगस पर पेंट कर देने से समस्या खत्म नहीं होती, इसलिए पहले नमी की वजह दूर करना जरूरी है.

किन बातों का रखें ध्यान?
घर में गीले कपड़े लंबे समय तक न सुखाएं. फर्नीचर को दीवार से थोड़ा दूर रखें और अलमारी के अंदर हवा का रास्ता बनाए रखें. कमरे में धूप आने दें और बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद एग्जॉस्ट फैन चलाएं. दीवारों पर बार-बार फंगस जम रही है, तो केवल सफाई करने के बजाय सीलन की स्थायी समस्या का समाधान कराएं. घर की नमी कम रखना ही फंगस से बचाव और परिवार की सेहत सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है.