भीड़-भाड़ से दूर अकेले रहना क्यों पसंद करते हैं कुछ लोग? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

कुछ लोग परिवार के साथ रहते हुए भी अकेले समय बिताना पसंद करते हैं. इसके पीछे introversion ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति, खुद के लिए समय और सामाजिक गतिविधियों के बाद आराम पाने जैसी कई वजहें हो सकती हैं.

भीड़-भाड़ से दूर अकेले रहना क्यों पसंद करते हैं कुछ लोग? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

टीनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर देखा जाता है कि पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से दूर रहने वाले लोगों को परिवार की याद सताती है. इसे आमतौर पर होमसिकनेस कहा जाता है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. कई लोग परिवार के साथ एक ही घर में रहते हुए भी अपना ज्यादातर समय अकेले कमरे में बिताना पसंद करते हैं. ऑफिस या कॉलेज से लौटने के बाद वे परिवार के साथ बैठने, बातचीत करने या साथ खाना खाने के बजाय अपने कमरे में रहना पसंद करते हैं. बाहर से देखने पर ऐसा व्यवहार अजीब लग सकता है, लेकिन हर बार इसका अर्थ नाराजगी, अकेलापन या परिवार से दूरी नहीं होता. मनोविज्ञान में अपनी इच्छा से कुछ समय अकेले बिताने को 'solitude' के रूप में देखा जाता है, जो loneliness यानी अकेलापन महसूस करने से अलग है. शोध बताते हैं कि व्यक्ति किस वजह से अकेला रहना चाहता है, यह उसके अनुभव और मानसिक स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है.

दिमाग को मिल सकता है आराम और 'रीचार्ज' होने का समय

दिनभर ऑफिस, कॉलेज, यात्रा और दूसरे लोगों से बातचीत के दौरान हमारा ध्यान लगातार अलग-अलग चीजों पर लगा रहता है. ऐसे में कुछ लोगों के लिए घर लौटने के बाद अकेले बैठना बाहरी सामाजिक दबाव से दूरी बनाने और शांत होने का तरीका हो सकता है. 21 दिनों तक लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक समय अकेले बिताने वाले दिनों में प्रतिभागियों ने कम तनाव और अधिक autonomy यानी अपनी जिंदगी और समय पर नियंत्रण का अनुभव किया. हालांकि ज्यादा अकेले समय के साथ कुछ लोगों में loneliness और कम संतुष्टि भी देखी गई. खास बात यह थी कि जब अकेले रहना व्यक्ति की अपनी पसंद था, तब इसके नकारात्मक प्रभाव कम दिखाई दिए.

क्या केवल Introvert लोग ही अकेले रहना पसंद करते हैं?

आमतौर पर माना जाता है कि जो व्यक्ति अकेला रहना पसंद करता है, वह introvert होगा. वैज्ञानिक शोध इस संबंध को इतना सीधा नहीं मानते. दो डायरी अध्ययनों में researchers को इस बात के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले कि introversion अपने आप में अकेले रहने की पसंद या उससे मिलने वाले आनंद की भविष्यवाणी करता है. इसके बजाय autonomy यानी अपनी इच्छा और पसंद के अनुसार समय बिताने की प्रवृत्ति, सकारात्मक solitude से अधिक जुड़ी मिली. इसलिए कोई व्यक्ति सामाजिक और मिलनसार होने के बावजूद दिन के कुछ घंटे अकेले बिताना पसंद कर सकता है.

अकेले रहने पर खुद के लिए मिलता है समय

कई लोगों के लिए अकेला समय सोचने, संगीत सुनने, पढ़ने, फिल्म देखने, अपने शौक पूरे करने या बिना किसी सामाजिक अपेक्षा के आराम करने का अवसर होता है. अलग-अलग उम्र के 2,035 लोगों पर हुए एक अध्ययन में solitude से जुड़े अनुभवों में autonomy, self-connection और शांति जैसे पहलू सामने आए. यानी कुछ लोगों के लिए अकेले रहना दुनिया से कटना नहीं, बल्कि खुद के साथ समय बिताना हो सकता है.

Solitude और Loneliness में है बड़ा अंतर

यह समझना जरूरी है कि अकेले रहना और अकेलापन महसूस करना एक ही बात नहीं है. कोई व्यक्ति कमरे में अकेला रहकर खुश और शांत महसूस कर सकता है, जबकि कोई परिवार और दोस्तों के बीच रहकर भी loneliness महसूस कर सकता है. शोध में भी loneliness को केवल इस आधार पर नहीं समझा जाता कि व्यक्ति कितने घंटे अकेला रहता है.

कब अकेले रहना चिंता की वजह हो सकता है?

अगर व्यक्ति अपनी इच्छा से अकेले समय का आनंद ले रहा है, पढ़ाई या नौकरी सामान्य रूप से कर रहा है और जरूरत पड़ने पर परिवार-दोस्तों से जुड़ता है, तो केवल अकेले रहना अपने आप में समस्या का प्रमाण नहीं है. लेकिन यदि सामाजिक संपर्क से लगातार बचना व्यक्ति को परेशान कर रहा हो या लंबे समय तक अलग-थलग रहने के साथ मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा के कामकाज में गिरावट दिखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. शोध में सामाजिक अलगाव और अकेले रहने की तीव्र पसंद, दोनों के साथ खराब मानसिक स्वास्थ्य के संबंध पाए गए हैं, हालांकि ऐसे अध्ययनों से सीधे कारण साबित नहीं होते.

इसलिए परिवार के साथ रहते हुए भी अपने कमरे में समय बिताने वाले हर व्यक्ति को 'अकेला' या 'उदास' मान लेना सही नहीं है. असली फर्क इस बात से पड़ता है कि वह व्यक्ति अकेला रहना चुन रहा है या खुद को अनचाहे तरीके से अलग-थलग महसूस कर रहा है.