एक दर्जन में 12 अंक ही क्यों? 12 महीने, घड़ी के 12 घंटे और 1 फीट में 12 इंच का क्या है राज?

क्या आपने कभी सोचा है कि हम रोजमर्रा की जिंदगी में 10 या 20 जैसी गोल संख्याओं का इस्तेमाल तो खूब करते हैं, लेकिन कुछ बेहद सामान्य चीजों के साथ अचानक संख्या 12 क्यों जुड़ जाती है? बाजार में केले या अंडे खरीदने जाएं तो एक दर्जन में 12 ही मिलते हैं.

एक दर्जन में 12 अंक ही क्यों? 12 महीने, घड़ी के 12 घंटे और 1 फीट में 12 इंच का क्या है राज?

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): क्या आपने कभी सोचा है कि हम रोजमर्रा की जिंदगी में 10 या 20 जैसी गोल संख्याओं का इस्तेमाल तो खूब करते हैं, लेकिन कुछ बेहद सामान्य चीजों के साथ अचानक संख्या 12 क्यों जुड़ जाती है? बाजार में केले या अंडे खरीदने जाएं तो एक दर्जन में 12 ही मिलते हैं. साल में 12 महीने होते हैं, घड़ी में 12 अंक होते हैं और एक फीट में 12 इंच होते हैं. आखिर 12 में ऐसी क्या खास बात है, जिसने हजारों सालों से हमारी गिनती और मापने की व्यवस्था में अपनी जगह बना रखी है?

12 को खास बनाता है इसका गणित

संख्या 12 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कई छोटी संख्याओं से आसानी से बांटा जा सकता है. 12 को 2, 3, 4 और 6 से पूरी तरह विभाजित किया जा सकता है. यही वजह है कि किसी चीज को बराबर हिस्सों में बांटने में 12 बेहद सुविधाजनक संख्या साबित होती है. मसलन, 12 वस्तुओं को दो हिस्सों में बांटें तो 6-6, तीन हिस्सों में बांटें तो 4-4 और चार हिस्सों में बांटें तो 3-3 वस्तुएं हो जाती हैं. यहां तक कि 12 को 6 बराबर हिस्सों में बांटने पर हर हिस्से में 2 वस्तुएं आती हैं. इसके मुकाबले 10 को केवल 2 और 5 से ही आसानी से विभाजित किया जा सकता है. इसलिए पुराने समय के व्यापार और माप-तौल में 12 उपयोगी संख्या बन गई.

एक दर्जन में 12 चीजें क्यों?

दर्जन का इस्तेमाल केवल सुविधा के लिए शुरू नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे गणितीय और ऐतिहासिक दोनों कारण माने जाते हैं. पुराने व्यापार में वस्तुओं को छोटे-छोटे बराबर हिस्सों में बांटना जरूरी होता था. 12 वस्तुओं का एक समूह इस काम के लिए काफी सुविधाजनक था. आज भी अंडे, केले जैसी कई चीजें दर्जन में बेची जाती हैं. हालांकि आधुनिक दुकानों और सुपरमार्केट में वजन के हिसाब से बिक्री भी आम हो गई है, फिर भी 'दर्जन' शब्द लोगों की रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बना हुआ है.

12 महीने ही क्यों होते हैं?

अब सवाल आता है कि साल में 12 महीने क्यों? इसका संबंध प्राचीन सभ्यताओं की समय गणना से जुड़ा है. प्राचीन लोगों ने चंद्रमा के चक्र और मौसम के बदलाव को समझने के लिए समय को अलग-अलग हिस्सों में बांटना शुरू किया. चंद्र चक्रों और सूर्य के आधार पर विकसित कैलेंडर प्रणालियों में 12 का महत्व धीरे-धीरे मजबूत हुआ. आज इस्तेमाल होने वाले ग्रेगोरियन कैलेंडर में भी साल को 12 महीनों में बांटा गया है. हालांकि सभी महीनों की अवधि बराबर नहीं है, लेकिन 12 महीनों की यह व्यवस्था सदियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बन चुकी है.

घड़ी में 12 अंक क्यों?

घड़ी पर नजर डालें तो वहां भी 12 हमारा पीछा नहीं छोड़ता. घड़ी के डायल को 12 हिस्सों में बांटना भी पुरानी समय मापन प्रणालियों से जुड़ा है. 12 हिस्सों में पूरा चक्र बांटने से हर हिस्से को आसानी से छोटे भागों में विभाजित किया जा सकता है. एक घंटे को 60 मिनट और एक मिनट को 60 सेकंड में बांटने की व्यवस्था भी प्राचीन गणितीय परंपराओं से जुड़ी है, जहां 60 जैसी संख्या को विभाजित करना आसान माना जाता था.

1 फीट में 12 इंच का राज

लंबाई मापने की पुरानी प्रणालियों में भी 12 का खूब इस्तेमाल हुआ. इसी परंपरा के कारण आज भी एक फुट में 12 इंच माने जाते हैं. 12 इंच को आधा, तिहाई, चौथाई या छठे हिस्से में बांटना आसान है. इसलिए माप-तौल में भी यह संख्या व्यावहारिक साबित होती रही.

आखिर 12 इतनी जगहों पर क्यों दिखता है?

दरअसल, 12 कोई जादुई संख्या नहीं है. इसकी खासियत इसकी विभाज्यता और ऐतिहासिक उपयोगिता में है. प्राचीन व्यापार, समय की गणना और माप-तौल जैसी जरूरतों ने 12 को लोकप्रिय बनाया और बाद की सभ्यताओं ने इन प्रणालियों को अपनाते हुए आगे बढ़ाया.यही वजह है कि बाजार में एक दर्जन अंडे हों, कैलेंडर में 12 महीने, घड़ी में 12 अंक या एक फीट में 12 इंच, इन सभी जगहों पर हमें एक ही संख्या बार-बार दिखाई देती है. यानी 12 सिर्फ गिनती का आंकड़ा नहीं, बल्कि गणित, इतिहास और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के बीच बना एक पुराना कनेक्शन है.