टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज के इस आधुनिक युग में सबकुछ मॉडर्न हो गया है. पुराने जमाने की स्लैट से लेकर आज की टैबलेट तक, चिठ्ठी से लेकर आज के स्मार्टफोन तक, बैल गाड़ी से लेकर बस फिर ट्रेन और फिर प्लेन तक, सबकुछ ऐसे तेज़ी से बदला जैसे सुपरफास्ट एक्स्प्रेस हो. समय के साथ हमारे घरों का स्वरूप ही नहीं, बल्कि सोने का तरीका भी बदल गया है. आपने देखा होगा कभी गांवों और शहरों के अधिकांश घरों में लकड़ी और रस्सियों से बनी चारपाई आम हुआ करती थी, लेकिन आज उसकी जगह आधुनिक बेड और गद्दों ने ले ली है. कई लोग मानते हैं कि चारपाई पर सोना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जबकि कुछ लोग आधुनिक ऑर्थोपेडिक गद्दों को बेहतर विकल्प बताते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वास्तव में पुराने जमाने की चारपाई शरीर के लिए अधिक लाभदायक थी?

चारपाई की खासियत क्या थी?
चारपाई लकड़ी के मजबूत फ्रेम और बुनी हुई रस्सियों से तैयार की जाती थी. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें हवा का अच्छा प्रवाह बना रहता था, जिससे गर्मियों में भी सोने में आराम मिलता था. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग खुले आंगन या छत पर चारपाई का इस्तेमाल करते हैं. यदि चारपाई की रस्सियां सही तरीके से कसी हुई हों, तो यह शरीर को संतुलित सहारा दे सकती है. हालांकि समय के साथ रस्सियां ढीली हो जाएं तो शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पीठ या कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है.
आधुनिक बेड और गद्दे क्यों हुए लोकप्रिय?
आज बाजार में स्प्रिंग, मेमोरी फोम, लेटेक्स और ऑर्थोपेडिक गद्दों सहित कई विकल्प उपलब्ध हैं. इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों को उचित सपोर्ट मिल सके. अच्छी गुणवत्ता वाला गद्दा रीढ़ की हड्डी को प्राकृतिक स्थिति में रखने में मदद कर सकता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर बना सकता है. हालांकि, बहुत ज्यादा मुलायम या जरूरत से अधिक कठोर गद्दा हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता. गलत गद्दे का चुनाव गर्दन, कंधे और कमर दर्द की वजह बन सकता है.

क्या चारपाई वास्तव में ज्यादा फायदेमंद है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कहना सही नहीं होगा कि चारपाई हमेशा आधुनिक बेड से बेहतर होती है. किसी भी बिस्तर का सबसे महत्वपूर्ण गुण यह है कि वह रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट दे और व्यक्ति आरामदायक नींद ले सके. यदि चारपाई मजबूत, समतल और अच्छी तरह कसी हुई है, तो यह कई लोगों के लिए आरामदायक हो सकती है. वहीं, यदि आधुनिक गद्दा व्यक्ति के वजन, उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार चुना गया है, तो वह भी उतना ही लाभदायक हो सकता है. यानी दोनों के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं.

अच्छी नींद के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बिस्तर बदलने से ही अच्छी नींद नहीं आती. नियमित समय पर सोना, स्क्रीन टाइम कम करना, सोने से पहले कैफीन का अधिक सेवन न करना और कमरे का वातावरण शांत रखना भी उतना ही जरूरी है. इसके अलावा तकिया भी ऐसा होना चाहिए जो गर्दन को सही सपोर्ट दे. यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमर, गर्दन या रीढ़ से जुड़ी समस्या है, तो अपनी जरूरत के अनुसार गद्दे या सोने की सतह का चुनाव डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से करना बेहतर होता है.

