स्टील, लोहे या नॉन-स्टिक, खाना पकाने के लिए कौन-सा बर्तन है सबसे बेहतर? जानें फायदे और नुकसान

क्या आपने कभी सोचा है कि खाना किस बर्तन में पकाया जा रहा है, कौन सा बर्तन सही है खाना पकाने के लिए या फिर बर्तन हमारी कुकिंग पर असर पड़ता है? हर बर्तन की अपनी खासियत और कुछ सीमाएं होती हैं. ऐसे में रसोई के लिए सही बर्तन चुनना जरूरी है, ताकि खाना बनाना आसान होने के साथ-साथ सुरक्षित भी रहे.

स्टील, लोहे या नॉन-स्टिक, खाना पकाने के लिए कौन-सा बर्तन है सबसे बेहतर? जानें फायदे और नुकसान

टीनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर कई लोग खाने के साथ बनाने के शौकीन होते है. कईयों को खाना पसंद होता है तो कई को खाना बनाना. अक्सर हम घर में कुछ खास बनाने की योजना बनाते समय इस बात पर खूब विचार करते हैं कि क्या बनाना है, कौन-सी सामग्री इस्तेमाल करनी है, कैसे बनेगा और स्वाद को बेहतर कैसे बनाना है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खाना किस बर्तन में पकाया जा रहा है, कौन सा बर्तन सही है खाना पकाने के लिए या फिर  बर्तन हमारी कुकिंग पर असर पड़ता है? बाजार में स्टील, एल्युमीनियम, लोहे और नॉन-स्टिक जैसे कई ऑप्शन मौजूद हैं. हर बर्तन की अपनी खासियत और कुछ सीमाएं होती हैं. ऐसे में रसोई के लिए सही बर्तन चुनना जरूरी है, ताकि खाना बनाना आसान होने के साथ-साथ सुरक्षित भी रहे.

रोजाना इस्तेमाल के लिए बेहतर है स्टील

स्टेनलेस स्टील के बर्तन भारतीय रसोई में खूब इस्तेमाल किए जाते हैं. ये मजबूत, टिकाऊ और साफ करने में आसान होते हैं. इनका एक बड़ा फायदा यह है कि सामान्य परिस्थितियों में ये खाने के साथ आसानी से रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करते. इसलिए दाल, चावल, सब्जी और दूध जैसी चीजें बनाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, पतले स्टील के बर्तनों में खाना जल्दी चिपक सकता है. इसलिए मोटे तले वाले बर्तन चुनना बेहतर होता है.

एल्युमीनियम के बर्तन

एल्युमीनियम के बर्तन हल्के होते हैं और जल्दी गर्म हो जाते हैं. यही कारण है कि इनमें खाना पकाने में समय कम लग सकता है. हालांकि, बिना कोटिंग वाले एल्युमीनियम के बर्तन टमाटर, इमली और नींबू जैसी अम्लीय चीजों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं. इससे खाने का स्वाद और रंग प्रभावित हो सकता है. ऐसे में खट्टी चीजें पकाने या लंबे समय तक रखने के लिए दूसरे बर्तनों का इस्तेमाल करना बेहतर है. अच्छी गुणवत्ता वाले एनोडाइज्ड एल्युमीनियम के बर्तन भी एक विकल्प हैं.

लोहे के बर्तन

लोहे की कड़ाही और तवे लंबे समय तक चलते हैं. इनमें खाना पकाने से भोजन में थोड़ी मात्रा में आयरन भी शामिल हो सकता है. हालांकि, इसका फायदा हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता. लोहे के बर्तन गर्म होने में समय लेते हैं, लेकिन गर्मी अच्छी तरह बनाए रखते हैं. इनकी नियमित सीजनिंग यानी तेल की परत बनाकर रखना जरूरी है, ताकि जंग न लगे और खाना कम चिपके. अम्लीय भोजन को लंबे समय तक इनमें पकाने से बचना चाहिए.

नॉन-स्टिक बर्तन

नॉन-स्टिक पैन में खाना कम तेल के साथ बनाया जा सकता है और सफाई भी आसान होती है. लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है. खाली पैन को तेज आंच पर गर्म न करें और निर्माता के निर्देशों का पालन करें. खरोंच वाली या परत उखड़ रही कड़ाही को बदल देना बेहतर है. खाना बनाने के लिए लकड़ी या सिलिकॉन के चम्मच इस्तेमाल करें और धातु के स्क्रबर से सफाई करने से बचें.

कौन-सा बर्तन चुनना है बेहतर?

रोजाना की कुकिंग के लिए स्टेनलेस स्टील एक उपयोगी विकल्प है. रोटी और डोसा बनाने के लिए लोहे का तवा और कम तेल में अंडे या पैनकेक बनाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला नॉन-स्टिक पैन इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, खट्टी चीजें पकाने और स्टोर करने के लिए गैर-प्रतिक्रियाशील बर्तन चुनें. ध्यान रखें कि सही बर्तन का चुनाव आपकी कुकिंग की जरूरत, तापमान और देखभाल पर निर्भर करता है. केवल किसी एक धातु को हर स्थिति में सबसे अच्छा मानने के बजाय, जरूरत के अनुसार अलग-अलग बर्तनों का इस्तेमाल करना समझदारी है.