आपका साबुन-शैंपू Veg है या Non-Veg? अब पैकेट देखकर तुरंत चलेगा पता

अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक्स में Veg या Non-Veg सामग्री की पहचान आसान होगी. नए नियम के तहत पैकेजिंग पर ग्रीन और रेड/ब्राउन डॉट से इसकी जानकारी मिलेगी.

आपका साबुन-शैंपू Veg है या Non-Veg? अब पैकेट देखकर तुरंत चलेगा पता

टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज के दौर में जब हम बाजार से खाने-पीने की कोई चीज खरीदते हैं, तो पैकेट पर बने एक छोटे से निशान से काफी हद तक पता चल जाता है कि वह प्रोडक्ट वेजिटेरियन है या नॉन-वेजिटेरियन. हरे रंग का निशान देखकर ग्राहक समझ जाता है कि प्रोडक्ट शाकाहारी है, जबकि दूसरे निर्धारित निशान से उसके मांसाहारी मूल की पहचान की जा सकती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीजें हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं, उनका क्या? साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, क्रीम, लोशन और दूसरे कॉस्मेटिक्स खरीदते वक्त क्या आपको पता होता है कि इनमें इस्तेमाल की गई सामग्री शाकाहारी मूल की है या मांसाहारी? खासकर जो लोग पूरी तरह शाकाहारी हैं, उनके लिए यह सवाल अक्सर उलझन पैदा करता है. पैकेट पर लंबी-चौड़ी इंग्रीडिएंट लिस्ट देखकर भी यह समझना आसान नहीं होता कि किसी प्रोडक्ट में इस्तेमाल सामग्री का स्रोत क्या है. ऐसे में अब घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार ने पैकेज्ड कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरी प्रोडक्ट्स की लेबलिंग को लेकर बड़ा बदलाव किया है.

अब पैकेट पर ही मिलेगा Veg या Non-Veg का संकेत

केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के लिए इन उत्पादों की पहचान आसान बनाने के उद्देश्य से Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011 में संशोधन किया है. नया नियम 21 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है. इसके तहत संबंधित पैकेज्ड उत्पादों की पैकेजिंग पर यह जानकारी देना जरूरी होगा कि उसमें इस्तेमाल सामग्री शाकाहारी मूल की है या मांसाहारी मूल की. शाकाहारी मूल वाले उत्पादों के लिए पैकेजिंग पर हरे रंग का डॉट लगाया जाएगा, जबकि मांसाहारी मूल वाले उत्पादों के लिए लाल या भूरे रंग का डॉट निर्धारित किया गया है. यानी अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और दूसरे कॉस्मेटिक्स या टॉयलेटरी प्रोडक्ट्स खरीदते समय ग्राहक को लंबी इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़कर अनुमान लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पैकेट पर मौजूद निर्धारित रंग का निशान उसे उत्पाद की श्रेणी समझने में मदद करेगा.

पैकेजिंग पर कहां दिखाई देगा निशान?

नए नियमों के मुताबिक यह निशान उत्पाद के पैकेज के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से में लगाया जाएगा. इसका मकसद यह है कि ग्राहक को खरीदारी के दौरान यह जानकारी आसानी से दिखाई दे. अभी तक कई पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जानकारी केवल इंग्रीडिएंट लिस्ट में दी जाती थी. ऐसे में आम ग्राहक के लिए यह समझना मुश्किल होता था कि किसी खास सामग्री का स्रोत क्या है. खासकर शाकाहारी उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति ज्यादा भ्रम पैदा कर सकती थी. अब निर्धारित रंग आधारित प्रतीक एक विजुअल संकेत के तौर पर काम करेगा. यानी ग्राहक पैकेट को हाथ में लेते ही एक नजर में यह पहचान सकेगा कि उत्पाद किस श्रेणी में आता है.

कंपनियों के लिए भी जरूरी होगा नियम का पालन

सरकार के इस बदलाव के बाद संबंधित निर्माताओं और विक्रेताओं को निर्धारित लेबलिंग नियमों का पालन करना होगा. बाजार में आने वाली संबंधित पैकेजिंग पर उत्पाद के शाकाहारी या मांसाहारी मूल की पहचान के लिए तय संकेत मौजूद होना जरूरी होगा. सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी ज्यादा स्पष्ट और सरल तरीके से उपलब्ध कराना है. हालांकि, किसी उत्पाद की पूरी संरचना और उसमें इस्तेमाल सामग्री की विस्तृत जानकारी के लिए इंग्रीडिएंट लिस्ट देखना अब भी महत्वपूर्ण रहेगा. नए रंग आधारित संकेत का उद्देश्य मुख्य रूप से उपभोक्ता को शुरुआती और आसान पहचान उपलब्ध कराना है. ऐसे में अगली बार जब आप साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट या कोई कॉस्मेटिक खरीदने जाएं, तो सिर्फ कीमत, ब्रांड और ऑफर ही न देखें, बल्कि पैकेट पर बने इस निर्धारित रंग के निशान पर भी नजर डालें. खासकर उन लोगों के लिए यह बदलाव उपयोगी हो सकता है जो अपने रोजमर्रा के इस्तेमाल में शाकाहारी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं.