टीनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल के लोगों में ट्रेंड को फॉलो करने का जज़्बा ऐसे हो गए है जैसे किसी ऐप्टिटूड को पास करने का और उसी में आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) का क्रेज तेज़ी से फैल रहा है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर जगह इसकी चर्चा है. कई लोग दावा करते हैं कि इससे वजन तेजी से कम होता है, ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है. हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए समान रूप से फायदेमंद नहीं होती. विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जीवनशैली को ध्यान में रखना जरूरी है.

क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग?
इंटरमिटेंट फास्टिंग कोई डाइट प्लान नहीं, बल्कि खाने का एक पैटर्न है. इसमें यह तय किया जाता है कि कब खाना है और कब नहीं. सबसे लोकप्रिय तरीका 16:8 है, जिसमें 16 घंटे का उपवास रखा जाता है और 8 घंटे के भीतर भोजन किया जाता है. इसके अलावा 14:10, 5:2 और Alternate Day Fasting जैसे तरीके भी अपनाए जाते हैं.
उपवास के दौरान केवल पानी, बिना चीनी वाली चाय या ब्लैक कॉफी जैसी कम कैलोरी वाली चीजें ली जा सकती हैं. भोजन के समय संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी होता है.
इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रमुख फायदे
वजन कम करने में मददगार
जब लंबे समय तक भोजन नहीं किया जाता तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा फैट का इस्तेमाल करना शुरू करता है. इससे वजन घटाने में मदद मिल सकती है. साथ ही, सीमित समय में भोजन करने से कुल कैलोरी का सेवन भी कम हो जाता है.
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक
कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बना सकती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है. हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं अपनाना चाहिए.
दिल की सेहत के लिए लाभकारी
यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL), ट्राइग्लिसराइड और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है. इससे हृदय रोगों का जोखिम कम होने की संभावना रहती है.
कोशिकाओं की मरम्मत में मदद
उपवास के दौरान शरीर में ऑटोफैगी (Autophagy) नामक प्रक्रिया सक्रिय होती है. इसमें शरीर पुरानी और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है.
मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर
कुछ शोध बताते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकती है और याददाश्त तथा एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकती है.

इंटरमिटेंट फास्टिंग के नुकसान
भूख और कमजोरी महसूस होना
शुरुआती दिनों में कई लोगों को तेज भूख, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और थकान महसूस हो सकती है. शरीर को इस नई दिनचर्या के अनुसार ढलने में समय लगता है.
ज्यादा खाने का खतरा
कुछ लोग उपवास खत्म होने के बाद जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं. इससे वजन कम होने की बजाय बढ़ भी सकता है.
पोषण की कमी
यदि खाने के समय संतुलित भोजन नहीं लिया जाए तो शरीर में जरूरी विटामिन, मिनरल और प्रोटीन की कमी हो सकती है.
सभी के लिए नहीं है उपयुक्त
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों, बुजुर्गों, खानपान संबंधी विकार से जूझ रहे लोगों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग सुरक्षित नहीं मानी जाती.

किन बातों का रखें ध्यान?
यदि आप इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करना चाहते हैं तो शुरुआत धीरे-धीरे करें. उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. भोजन के समय फल, सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट को अपनी डाइट में शामिल करें. जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनाए रखें. यदि किसी तरह की कमजोरी, चक्कर या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

