मेला घूमने के दौरान अगर हो भगदड़ की स्तिथि, तो इन बातों का रखें खास ख्याल
भगदड़ में अक्सर लोग अपने सोचने की क्षमता खो देते है. यही वजह है की लोगों की जान चली जाती है या फिर घायल हो जाते है है. ऐसे में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा जिससे आप मेले में भगदड़ के दौरान बच सके.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): कोलकाता में दुर्गा पूजा में हुए भगदड़ में 19 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी. ऐसे में वहाँ मौजूद लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाया की पंडाल में व्यापक व्यवस्था नहीं होने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ. ऐसे में अक्सर लोग सोचते हैं कि भगदड़ के दौरान तेजी से भागकर या भीड़ को धक्का देकर बाहर निकलने से जान बच सकती है, लेकिन ऐसा करना खतरा बढ़ा सकता है. ऐसे में ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सही तरीके से खुद को संभालना जरूरी है. मेला घूमने या पूजा पंडाल में अचानक भगदड़ मचने पर इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

घबराएं नहीं, भीड़ के बहाव को समझें
भगदड़ के दौरान सबसे पहले खुद को शांत रखने की कोशिश करें. अचानक दौड़ने, दूसरों को धक्का देने या भीड़ के विपरीत दिशा में जाने से बचें. अगर लोग एक दिशा में बढ़ रहे हैं, तो उनके बहाव के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश करें. मौका मिलने पर तिरछे रास्ते से भीड़ के किनारे की ओर निकलें. हालांकि, अगर रास्ता बंद हो या दबाव बहुत ज्यादा हो, तो जबरदस्ती आगे बढ़ने की कोशिश न करें.
छाती के सामने हाथ रखें
भीड़ का दबाव बढ़ने पर सीने पर दबाव पड़ने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में दोनों हाथों को छाती के सामने मोड़कर रखें. इससे छाती के आसपास थोड़ी जगह बनाए रखने में मदद मिल सकती है. हाथों को शरीर से बिल्कुल सटाकर रखने के बजाय ऐसी स्थिति में रखें कि छाती पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक कम हो सके. अपने पैरों पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें.
फोन या चप्पल उठाने के लिए न झुकें
भीड़ में चलते समय अगर आपका मोबाइल, चप्पल या कोई दूसरा सामान नीचे गिर जाता है, तो उसे उठाने के लिए रुकना या झुकना खतरनाक हो सकता है. ऐसा करने से संतुलन बिगड़ सकता है और आप नीचे गिर सकते हैं. इसलिए सामान की चिंता छोड़कर अपनी जान बचाने पर ध्यान दें. भीड़ के बीच अचानक रुकने से भी बचें.

जमीन पर गिर जाएं तो सिर और गर्दन बचाएं
अगर धक्के के कारण आप जमीन पर गिर जाते हैं, तो जल्द से जल्द उठने की कोशिश करें, बशर्ते ऐसा करना सुरक्षित हो. आसपास के लोगों की मदद से खड़े होने का मौका मिले तो उसका इस्तेमाल करें. यदि उठना संभव न हो, तो करवट लेकर शरीर को समेटें और हाथों से सिर व गर्दन को ढकें. इससे शरीर के संवेदनशील हिस्सों को कुछ सुरक्षा मिल सकती है. सिर को बचाना जरूरी है. हालांकि, इस स्थिति में भीड़ का दबाव कम होने पर ही उठने की कोशिश करें.
दीवार और बैरिकेड के पास फंसने से बचें
भगदड़ के दौरान दीवार, लोहे की रेलिंग, बैरिकेड और बंद दरवाजे के पास फंसना खतरनाक हो सकता है. भीड़ का दबाव बढ़ने पर इन जगहों पर शरीर दबने का खतरा रहता है. इसलिए पहले से ही ऐसे स्थानों की पहचान करें, जहां से बाहर निकलने का रास्ता उपलब्ध हो. भीड़ बढ़ने लगे तो दीवार या बैरिकेड के सहारे खड़े रहने के बजाय सुरक्षित निकास की ओर बढ़ने का मौका तलाशें.
पंडाल में घुसने से पहले निकास द्वार देखें
मेला या पूजा पंडाल में प्रवेश करते समय सिर्फ सजावट और मूर्तियों पर ध्यान न दें. वहां मौजूद आपातकालीन निकास द्वार, खुले रास्ते और सुरक्षा कर्मियों की स्थिति भी देख लें. भीड़ बहुत ज्यादा हो तो अंदर जाने की जल्दबाजी न करें. यदि किसी जगह पर लगातार धक्का-मुक्की हो रही है, तो वहां जाने से बचें. प्रशासन की ओर से रास्ता बंद करने या भीड़ को दूसरी दिशा में भेजने के निर्देश मिलें, तो उनका पालन करें.
बच्चों और बुजुर्गों का रखें खास ध्यान
परिवार के साथ मेला घूमने जा रहे हैं, तो बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ के बीच अकेला न छोड़ें. छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर अपने साथ रखें. बच्चों की जेब में नाम, अभिभावक का मोबाइल नंबर और जरूरी संपर्क जानकारी लिखकर रख सकते हैं. परिवार के सदस्यों के बिछड़ने की स्थिति में मिलने के लिए पहले से कोई जगह तय कर लें. हालांकि, भगदड़ के दौरान किसी को खोजने के लिए भीड़ के विपरीत दिशा में जाने का जोखिम न उठाएं.

अफवाहों पर ध्यान न दें
भगदड़ के दौरान किसी के चिल्लाने या अफवाह फैलने से लोग अचानक भागने लगते हैं. इससे स्थिति और बिगड़ सकती है. इसलिए बिना पुष्टि के किसी बात पर भरोसा न करें. पुलिस, सुरक्षा कर्मियों और लाउडस्पीकर से मिलने वाले आधिकारिक निर्देशों का पालन करें. यदि कोई घायल दिखाई दे, तो खुद को खतरे में डाले बिना सुरक्षा कर्मियों को इसकी जानकारी दें.