क्या आप भी खाना खाते समय देखते हैं फोन या टीवी? जाने क्या कहते हैं एक्सपर्ट

खाना खाते समय मोबाइल या टीवी देखने की आदत आम है, लेकिन इससे हमारा ध्यान भोजन से भटक सकता है. जानिए माइंडफुल ईटिंग क्या है और एक्सपर्ट इसे क्यों अपनाने की सलाह देते हैं.

क्या आप भी खाना खाते समय देखते हैं फोन या टीवी? जाने क्या कहते हैं एक्सपर्ट

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल खाना खाते समय मोबाइल चलाना या टीवी देखना बहुत आम आदत बन गई है. कई लोग खाना खाते वक्त लगातार रील्स स्क्रॉल करते रहते हैं, मैसेज चेक करते हैं या टीवी पर कोई शो देखते हैं. ऐसे में ध्यान खाने से ज्यादा स्क्रीन पर होता है. प्लेट में क्या है, उसका स्वाद कैसा है और पेट कब भर गया, इन चीजों पर हमारा ध्यान कम हो जाता है. सवाल यह है कि क्या खाना खाते समय इस तरह का डिस्ट्रैक्शन जरूरी है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भोजन के दौरान कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूरी बनाकर खाने पर ध्यान देना एक बेहतर आदत हो सकती है. इसे माइंडफुल ईटिंग यानी सजग होकर भोजन करना कहा जाता है.

खाना सामने, लेकिन ध्यान कहीं और

हम रोजमर्रा की जिंदगी में कई काम ऐसे करते हैं, जिन्हें लगभग बेध्यानी में करने लगते हैं. खाना भी उनमें से एक है. हम डाइनिंग टेबल पर बैठे होते हैं, लेकिन दिमाग ऑफिस के काम, घर की चिंता या किसी पुराने मुद्दे में उलझा होता है. हाथ में मोबाइल होता है और नजर कभी स्क्रीन पर तो कभी प्लेट पर. इसी दौरान खाना खत्म हो जाता है, लेकिन हमें ठीक से याद भी नहीं रहता कि हमने क्या खाया या उसका स्वाद कैसा था. यह सिर्फ भोजन तक सीमित बात नहीं है. कई बार हम बातचीत, घूमने या परिवार के साथ बिताए समय में भी पूरी तरह मौजूद नहीं होते. शरीर एक जगह होता है, लेकिन हमारा ध्यान दूसरी जगह. माइंडफुल ईटिंग इसी आदत को पहचानने और धीरे-धीरे बदलने का एक तरीका है.

क्या है माइंडफुल ईटिंग?

हार्वर्ड हेल्थ के एक लेख में विशेषज्ञ रोनाल्ड डी. सीगल वर्तमान क्षण से जुड़ने के लिए माइंडफुल ईटिंग का अभ्यास करने की सलाह देते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि खाना खाते समय आपको किसी खास नियम का पालन करना है या अपने विचारों को पूरी तरह रोक देना है. इसका सीधा मतलब है कि भोजन करते समय अपना ध्यान भोजन की तरफ लाने की कोशिश करें. मसलन, खाने का रंग कैसा है, उसकी खुशबू कैसी है, स्वाद में क्या बदलाव महसूस हो रहा है और भोजन का स्पर्श कैसा है, इन छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान दिया जा सकता है. खाने की गति को भी महसूस करें और हर निवाले को जल्दबाजी में निगलने के बजाय उसका अनुभव करें. इस तरह भोजन करना एक सामान्य काम के बजाय जागरूक अनुभव बन सकता है.

ध्यान भटके तो खुद को दोष न दें

माइंडफुलनेस का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि खाना खाते समय आपके मन में कोई दूसरा विचार नहीं आना चाहिए. ऐसा होना स्वाभाविक है. हो सकता है खाना खाते वक्त आपको अचानक किसी पुराने विवाद की याद आ जाए. फिर किसी जरूरी काम की चिंता शुरू हो जाए या आने वाले दिन की योजना दिमाग में घूमने लगे. ऐसी स्थिति में खुद को परेशान करने की जरूरत नहीं है. बस यह पहचानें कि आपका ध्यान भोजन से हट गया है और धीरे से उसे वापस खाने पर ले आएं. यही माइंडफुलनेस का अभ्यास है. बार-बार ऐसा करने से वर्तमान क्षण पर ध्यान देने की आदत विकसित की जा सकती है.

भोजन के लिए आभार जताने का तरीका

कई घरों में आज भी खाना शुरू करने से पहले प्रार्थना या भोजन के लिए आभार व्यक्त करने की परंपरा है. इसके पीछे एक भाव यह भी है कि भोजन को केवल पेट भरने की चीज न मानकर उसके महत्व को महसूस किया जाए. खाने से पहले कुछ सेकंड रुककर यह सोचा जा सकता है कि यह भोजन हमारी प्लेट तक कैसे पहुंचा. खेत में इसे उगाने वाले किसान से लेकर इसे बाजार तक पहुंचाने वाले लोगों और फिर इसे तैयार करने वाले व्यक्ति तक, कई लोगों की मेहनत इसमें शामिल होती है. इसके लिए किसी औपचारिक प्रार्थना की जरूरत नहीं है. मन में कुछ पल का आभार भी पर्याप्त हो सकता है.

सिर्फ खाने में नहीं, पूरी जिंदगी में काम आएगा अभ्यास

माइंडफुल ईटिंग का मकसद खाने का तरीका बदलना नहीं, बल्कि भोजन करते समय उस पल को महसूस करना है. धीरे-धीरे यही अभ्यास जिंदगी के दूसरे हिस्सों में भी अपनाया जा सकता है. किसी से बातचीत करते समय मोबाइल देखने के बजाय उसकी बात ध्यान से सुनना, चलते समय आसपास की आवाजों और वातावरण को महसूस करना या परिवार के साथ बैठकर कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताना भी वर्तमान में लौटने के तरीके हो सकते हैं.

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर बड़े और खास पलों की तलाश में रहते हैं, जबकि सुकून कई बार उन्हीं सामान्य पलों में छिपा होता है, जिन्हें हम जल्दबाजी और डिस्ट्रैक्शन के कारण महसूस ही नहीं कर पाते. इसलिए अगली बार खाना खाते समय फोन या टीवी की तरफ हाथ बढ़ाने से पहले कुछ देर रुकिए और अपनी प्लेट पर ध्यान दीजिए. हो सकता है भोजन का वही परिचित स्वाद आपको इस बार थोड़ा अलग महसूस हो.