साबुन से रोज नहाना सही या गलत? जानिए त्वचा पर क्या पड़ता है असर
क्या रोज साबुन से नहाना त्वचा के लिए सही है? जानिए एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोज साबुन इस्तेमाल करने से त्वचा पर क्या असर पड़ सकता है और ड्राई स्किन से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): रोज नहाना हमारी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या हर दिन साबुन का इस्तेमाल करना त्वचा के लिए सही है? कुछ लोगों का मानना है कि रोज साबुन लगाने से त्वचा पूरी तरह साफ रहती है, जबकि कुछ लोग कहते हैं कि साबुन त्वचा की नमी छीन लेता है और इससे स्किन ड्राई हो सकती है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर सही क्या है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रोज नहाना और रोज पूरे शरीर पर साबुन लगाना दोनों अलग बातें हैं. नहाने की जरूरत व्यक्ति की गतिविधि, मौसम, पसीना और त्वचा की प्रकृति पर निर्भर कर सकती है. वहीं साबुन के इस्तेमाल में त्वचा के प्रकार और प्रोडक्ट का चुनाव भी महत्वपूर्ण होता है.

क्या रोज साबुन लगाना जरूरी है?
अगर कोई व्यक्ति रोज नहाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि हर बार पूरे शरीर पर साबुन लगाना जरूरी है. सामान्य तौर पर शरीर के जिन हिस्सों में अधिक पसीना आता है या जहां गंदगी और बदबू ज्यादा जमा होती है, वहां साबुन या क्लींजर का इस्तेमाल अधिक जरूरी हो सकता है. वहीं हाथ, पैर, गर्दन, बगल और शरीर के अन्य हिस्सों को साफ रखना जरूरी है. बहुत ज्यादा साबुन इस्तेमाल करने या बार-बार त्वचा को रगड़ने से त्वचा की प्राकृतिक नमी और सुरक्षात्मक परत प्रभावित हो सकती है. खासकर संवेदनशील या ड्राई स्किन वाले लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए.

साबुन त्वचा को कैसे प्रभावित करता है?
त्वचा की बाहरी परत शरीर को बाहरी वातावरण से बचाने के साथ नमी बनाए रखने में भी भूमिका निभाती है. कुछ साबुन त्वचा से तेल और गंदगी हटाने के साथ प्राकृतिक ऑयल को भी कम कर सकते हैं. इसके कारण कुछ लोगों को नहाने के बाद त्वचा में खिंचाव, रूखापन या खुजली महसूस हो सकती है. अगर साबुन इस्तेमाल करने के बाद बार-बार जलन, लालिमा या बहुत अधिक ड्राईनेस महसूस हो रही है, तो प्रोडक्ट बदलने या त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत हो सकती है. हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को सूट करने वाला साबुन आपके लिए भी सही हो, यह जरूरी नहीं.
क्या रोज नहाना त्वचा के लिए नुकसानदायक है?
रोज नहाना अपने आप में नुकसानदायक नहीं माना जाता. असल फर्क नहाने के तरीके से पड़ सकता है. बहुत गर्म पानी से लंबे समय तक नहाने और त्वचा को जोर से रगड़ने से ड्राईनेस बढ़ सकती है. इसी तरह बार-बार साबुन या तेज क्लीनिंग प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से भी त्वचा की नमी कम हो सकती है. इसलिए नहाते समय बहुत गर्म पानी के बजाय सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना और नहाने के बाद त्वचा को धीरे से सुखाना बेहतर आदत मानी जाती है.

क्या रोज शैंपू करना भी जरूरी है?
साबुन की तरह शैंपू को लेकर भी लोगों में कई तरह की धारणाएं हैं. हर व्यक्ति के लिए रोज शैंपू करना जरूरी नहीं है. बालों और स्कैल्प में तेल बनने की मात्रा, पसीना, धूल-मिट्टी, हेयर प्रोडक्ट और बालों की प्रकृति के आधार पर शैंपू करने की जरूरत अलग हो सकती है. बहुत ज्यादा शैंपू करने से कुछ लोगों में स्कैल्प की ड्राईनेस बढ़ सकती है, जबकि ऑयली स्कैल्प वाले लोगों को ज्यादा बार बाल धोने की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए शैंपू की फ्रीक्वेंसी अपनी जरूरत और स्कैल्प की स्थिति के अनुसार तय करना बेहतर है.
रोज साबुन को लेकर कौन-सा मिथक सही नहीं?
एक आम धारणा है कि जितना ज्यादा साबुन और झाग होगा, त्वचा उतनी ही ज्यादा साफ होगी. ऐसा जरूरी नहीं है. ज्यादा झाग का मतलब हमेशा बेहतर सफाई नहीं होता. इसी तरह यह भी जरूरी नहीं कि साबुन बिल्कुल बंद कर दिया जाए तो त्वचा ज्यादा स्वस्थ रहेगी. शरीर की सफाई जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा क्लीनिंग से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सही तरीका यह है कि त्वचा की जरूरत के अनुसार माइल्ड क्लीनजर या साबुन का इस्तेमाल किया जाए और नहाने के बाद जरूरत होने पर मॉइस्चराइजर लगाया जाए.

त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
अगर आपकी त्वचा सामान्य है तो रोज नहाना और जरूरत के अनुसार साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है. ड्राई या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को माइल्ड और मॉइस्चराइजिंग क्लीनजर इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए. नहाने के तुरंत बाद मॉइस्चराइजर लगाने से त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है. वहीं अगर साबुन या किसी स्किन केयर प्रोडक्ट से लगातार खुजली, जलन, लालिमा, पपड़ी या रैश की समस्या हो रही है, तो खुद से इलाज करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.