टीनपी डेस्क (TNP DESK): भारतीय संस्कृति में ऐसे ऐसे परंपरा शामिल है जिन्हें आज के लोग ना के बराबर मानते है. ऐसे मे भारतीय संस्कृति में नीचे बैठ कर खाना खाना बहुत आम है. यही कारण है कि पुराने समय में अधिकांश घरों में लोग जमीन पर आसन बिछाकर बैठकर भोजन करते थे. आधुनिक जीवनशैली में डाइनिंग टेबल और कुर्सियों ने इस परंपरा की जगह ले ली है, लेकिन आज भी कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सही तरीके से फर्श पर बैठकर खाना खाने के कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं. हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि उम्र, जोड़ों की स्थिति और शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही इस आदत को अपनाना चाहिए.

फर्श पर बैठकर भोजन करने की परंपरा क्यों थी?
भारतीय परंपरा में सुखासन, पद्मासन या पालथी मारकर बैठकर भोजन करने को शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना जाता था. यह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा था. माना जाता था कि इस मुद्रा में बैठने से व्यक्ति शांत मन से भोजन करता है, भोजन को अच्छी तरह चबाता है और जल्दबाजी से बचता है. इससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है और भोजन के प्रति सजगता बढ़ती है.
क्या कहते हैं डॉक्टर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फर्श पर पालथी मारकर बैठने से शरीर की कई मांसपेशियां सक्रिय होती हैं. इस मुद्रा में बैठने और फिर उठने के दौरान घुटनों, कूल्हों और पैरों की मांसपेशियों का उपयोग होता है, जिससे शरीर का लचीलापन बना रह सकता है. साथ ही, आगे झुककर निवाला लेने और फिर सीधा बैठने की प्राकृतिक गतिविधि पाचन तंत्र को भी सक्रिय रखने में मदद कर सकती है. हालांकि, डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि इन फायदों पर अभी सीमित वैज्ञानिक शोध उपलब्ध हैं. इसलिए इन्हें स्वास्थ्य सुधार का निश्चित उपाय नहीं माना जाना चाहिए.

पाचन पर क्या पड़ता है असर?
जब व्यक्ति पालथी मारकर बैठता है तो वह सामान्यतः धीरे-धीरे भोजन करता है. इससे भोजन अच्छी तरह चबाया जाता है और पेट को तृप्ति का संकेत समय पर मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि धीरे खाने से जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना कम हो सकती है, जो वजन नियंत्रण में भी सहायक हो सकता है.
शरीर के लिए संभावित फायदे
- शरीर का संतुलन और लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
- कूल्हों और घुटनों की गतिशीलता बेहतर रह सकती है.
- धीरे और ध्यानपूर्वक भोजन करने की आदत विकसित होती है.
- अधिक भोजन करने की संभावना कम हो सकती है.
- भोजन के समय मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ सकती है.
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए जमीन पर बैठकर खाना खाना आसान या सुरक्षित नहीं होता. जिन लोगों को घुटनों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, हिप रिप्लेसमेंट, संतुलन की समस्या या अधिक उम्र के कारण उठने-बैठने में कठिनाई होती है, उन्हें जबरदस्ती ऐसा नहीं करना चाहिए. ऐसे लोग कुर्सी पर बैठकर भी आराम से और सही मुद्रा में भोजन कर सकते हैं.

क्या डाइनिंग टेबल पर खाना गलत है?
बिल्कुल नहीं. डॉक्टरों का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप भोजन आराम से, बिना जल्दबाजी और बिना मोबाइल या टीवी में खोए हुए करें. यदि डाइनिंग टेबल पर बैठकर भी आप संतुलित भोजन करते हैं, अच्छी तरह चबाते हैं और सही मुद्रा बनाए रखते हैं, तो यह भी पूरी तरह स्वस्थ तरीका है.

