सरायकेला: आदित्यपुर की रीत ने एथलेटिक्स में जीते दो गोल्ड, अब ओलंपिक में भारत के लिए खेलने का सपना
सरायकेला के आदित्यपुर की 10वीं की छात्रा रीत कुमारी ने जिला एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉटपुट और हैमर थ्रो में गोल्ड मेडल जीता है. बिना प्रोफेशनल कोच के तैयारी कर रही रीत का सपना ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है.
सरायकेला (Saraikela): आदित्यपुर के माझीटोला स्थित निर्मल नगर की रहने वाली रीत कुमारी ने खेल के मैदान में शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है. जिला एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रीत ने एक ही दिन में शॉटपुट और हैमर थ्रो में गोल्ड मेडल जीतकर दोहरी सफलता हासिल की. खास बात यह है कि रीत अभी 10वीं कक्षा की छात्रा हैं और बिना किसी पेशेवर कोच के लगातार अपनी तैयारी कर रही हैं.
रीत की इस कामयाबी के बाद परिवार के साथ पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार और वार्ड नंबर 14 की पार्षद सुनीता बेरा रीत के घर पहुंचे. उन्होंने अंगवस्त्र देकर रीत को सम्मानित किया और आगे भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दीं.
रीत की सफलता से उनके पिता रमेश कुमार तिवारी और मां सोनी तिवारी बेहद खुश हैं. परिवार को उम्मीद है कि सही प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने पर रीत आने वाले समय में बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं.
तीन साल से लगातार कर रही हैं मेहनत
रीत ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा से एथलेटिक्स की तैयारी शुरू की थी. पिछले तीन साल से वह लगातार अभ्यास कर रही हैं. जिला चैंपियनशिप में उन्होंने हैमर थ्रो में 29 मीटर तक थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. हालांकि उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 32 मीटर है.
रीत के सामने सबसे बड़ी परेशानी अच्छे कोच की कमी है. उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर मैदान और स्टेडियम तो हैं, लेकिन खिलाड़ियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग देने के लिए अनुभवी कोच की सुविधा नहीं मिल पा रही है. इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी तकनीक सुधारने और आगे बढ़ने में परेशानी होती है.
रीत का लक्ष्य केवल जिला या राज्य स्तर तक सीमित नहीं है. उनका सपना ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है. उनका मानना है कि अगर उन्हें बेहतर ट्रेनिंग, जरूरी संसाधन और अनुभवी कोच का मार्गदर्शन मिले तो वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं.
रीत ने सरकार और प्रशासन से स्थानीय खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था करने की मांग की है. उनका कहना है कि छोटे शहरों और स्थानीय इलाकों में प्रतिभा की कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ सही समय पर बेहतर सुविधा और मार्गदर्शन देने की है.