झारखंड के लिए जीते 5 मेडल, आज हाथ में झाड़ू, सुनिता उरांव को लेकर हेमंत सरकार पर बरसे बाबूलाल मरांडी

झारखंड की खिलाड़ी सुनिता उरांव की स्थिति को लेकर बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है. दो गोल्ड समेत पांच मेडल जीत चुकी सुनिता पिछले करीब आठ-नौ वर्षों से खेल निदेशालय परिसर में सफाई का काम कर रही हैं.

झारखंड के लिए जीते 5 मेडल, आज हाथ में झाड़ू, सुनिता उरांव को लेकर हेमंत सरकार पर बरसे बाबूलाल मरांडी

रांची (RANCHI): झारखंड की खिलाड़ी सुनिता उरांव की मौजूदा स्थिति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जिस खिलाड़ी ने झारखंड के लिए मेडल जीते, आज उसी के हाथ में झाड़ू है. बाबूलाल ने इसे दुखद बताते हुए राज्य सरकार से सुनिता को खेल कोटे के तहत उनकी योग्यता के अनुसार सम्मानजनक नौकरी देने की मांग की है.

झारखंड की खेल प्रतिभाओं, विशेषकर आदिवासी बच्चे-बच्चियों के साथ इसी तरह का सौतेला व्यवहार किया जाता है। यह बेहद शर्मनाक है कि थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में राज्य के लिए 2 गोल्ड सहित 5 मेडल जीतने वाली बेटी के हाथों में आज मेडल की जगह झाड़ू थमा दी गई है।

खेल आयोजनों में ई-रिक्शे में डीजल… https://t.co/xjzccZKHsz

— Babulal Marandi (@yourBabulal) September 13, 2026

प्रचार पर करोड़ों, खिलाड़ी के लिए नौकरी नहीं: बाबूलाल

बाबूलाल मरांडी ने खेल विभाग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि खेल आयोजनों और उनके प्रचार-प्रसार पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन राज्य के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को रोजगार नहीं मिल रहा है.

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि जिस खिलाड़ी ने झारखंड के लिए मेडल जीते हैं, क्या उसे उसकी योग्यता के आधार पर सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलना चाहिए?

बाबूलाल ने कहा कि सरकार को सुनिता के हाथ से झाड़ू हटाकर उन्हें खेल कोटे के तहत नौकरी देनी चाहिए और उनकी प्रतिभा का सम्मान करना चाहिए.

दो गोल्ड समेत पांच मेडल जीत चुकी हैं सुनिता

सुनिता उरांव राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रही हैं. उन्होंने थ्रो और वॉलीबॉल में झारखंड को रेप्रिज़ेन्ट किया है. इन प्रतियोगिताओं में वह राज्य के लिए दो गोल्ड समेत कुल पांच मेडल जीत चुकी हैं. वह तमिलनाडु और राजस्थान में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुकी हैं.

इसके बावजूद सुनिता पिछले करीब आठ-नौ वर्षों से रांची के मोरहाबादी स्थित खेल निदेशालय परिसर में सफाई का काम कर रही हैं. इसके बदले उन्हें करीब 10 हजार रुपये प्रति महीने मिलते हैं.

सुनिता का कहना है कि आर्थिक मजबूरी के कारण उन्हें यह काम करना पड़ रहा है. उनकी मांग है कि सरकार उनकी खेल उपलब्धियों और योग्यता को देखते हुए खेल कोटे से सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराए.

दिल्ली से भी मिला मदद का ऑफर

सुनिता का मामला सामने आने के बाद नीतू सिंह ने भी वीडियो जारी कर मदद की पेशकश की है. उन्होंने सुनिता को दिल्ली आने की अपील करते हुए उनके रहने, खाने और इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग की व्यवस्था कराने की बात कही है.

फिलहाल सुनिता के मामले को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सीधे राज्य सरकार पर सवाल उठाया है. उनकी मांग है कि मेडल जीत चुकी खिलाड़ी को सफाई के काम की जगह उसकी योग्यता के मुताबिक नौकरी दी जाए.