देवेन्द्र से कौन डर रहा, सरकार या पुलिस! JPSC-JSSC आंदोलन का क्या होगा परिणाम, जानिए

देवेन्द्र से कौन डर रहा, सरकार या पुलिस! JPSC-JSSC आंदोलन का क्या होगा परिणाम, जानिए

रांची (RANCHI): झारखंड लोक सेवा आयोग और  झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की परत खुल रही है. इस परत के खुलने के साथ ही छात्रों का आंदोलन भी तेज हो गया. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 23 दिन से प्रदर्शन जारी है. कुछ छात्र भूख हड़ताल पर बैठे है. कई अस्पताल तक पहुंच गए. इस बीच स्वतंत्र दिवस के दिन छात्र नेता देवेन्द्र महतो की अस्पताल से तस्वीर सामने आई. जिसने कई सवाल खड़े कर दिए. आखिर तिरंगा यात्रा में शामिल होने से क्यों रोका गया. छात्रों ने सवाल उठाया कि आखिर देवेन्द्र महतो से कौन डरा सरकार या पुलिस?जिसका जवाब ना सरकार के कोई हकीम दे पा रहे और ना ही पुलिस महकमे के कोई अधिकारी.

तस्वीर काफी बड़ी थी जब स्वतंत्रता दिवस का जश्न पूरे देश में मनाया जा रहा है. हर तरफ आजादी के 80 वीं वर्षगाठ पर उत्साह का माहौल था. इसी शोर के बीच रांची के सदर अस्पताल में छात्र नेता देवेन्द्र महतो की चिल्ला रहे थे.अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन अस्पताल में उनके कमरे के बाहर पुलिस जवानों को तैनात कर दिया गया. देवेन्द्र जब बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे तब पुलिस वालों ने जबरन रोक दिया. वह छात्रों के शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए जा रहे थे. लेकिन यह वीडियो सामने आने के बाद सवाल खड़ा हो गया.

बाद में इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से जवाब आया और देवेन्द्र महतो के हेलट बुलेटिन को जारी करते हुए बताया गया की भूख हड़ताल पर होने की वजह से उनकी हालत सही नहीं है. उन्हे भीड़ में जाने से उनकी सेहत पर असर पड़ सकता था. इसी वजह से उन्हे रेस्ट करने की सलाह दी गई है.

लेकिन इस पूरे बवाल के बीच लोगों ने सवाल पूछा की जब विधानसभा का घेराव किया जा रहा था. इस समय हजारों की भीड़ रांची में थी अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन में विधानसभा घेराव शामिल हुआ. इस भीड़ में देवेन्द्र महतो एम्बुलेंस से पहुंचे. यहां आखिर किसी पुलिस अधिकारी को उनके सेहत की फिक्र क्यों नहीं हुई. जब की यहां लाठी से लेकर आँशु गैस तक चलाए गए. इसी में देवेन्द्र महतो की तबीयत भी बिगड़ी जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन जब शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा निकाला जा रहा था तब पुलिस और डॉक्टरों को उनकी सेहत की फिक्र हुई.

ऐसे में छात्र सवाल उठा रहे की सरकार और पुलिस देवेन्द्र से डर गई है. देवेन्द्र महतो शुरू से छात्रों के लिए आंदोलन करते रहे है. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब पुलिस ने तानाशाही देखाई और उनके नेता को कैद कर दिया. इससे यह साबित होता है कि छात्र के आंदोलन से सरकार कितना दबाव में है. उनके नेता को रोक कर आंदोलन को खत्म नहीं किया जा सकता है. हर छात्र देवेन्द्र महतो है और JPSC-JSSC की लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ेंगे.

इसी हंगामे के बीच अब छात्रों ने आंदोलन को और तेज कर दिया है. रविवार देर शाम मुख्यमंत्री का पुतला दहन की घोषणा की है. साथ ही 18 अगस्त तक मांग पूरी नहीं होने पर 20 को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है.