झारखंड विधानसभा में शान से लहराया तिरंगा, अध्यक्ष ने कहा- लोकतंत्र की मजबूती के साथ समावेशी विकास है जरूरी

झारखंड विधानसभा परिसर में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर विधानसभा अध्यक्ष ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी. संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, झारखंड के आदिवासी नायकों, लोकतंत्र, संविधान और समावेशी विकास पर जोर दिया.

झारखंड विधानसभा में शान से लहराया तिरंगा, अध्यक्ष ने कहा- लोकतंत्र की मजबूती के साथ समावेशी विकास है जरूरी

रांची (RANCHI): देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झारखंड विधानसभा परिसर में पूरे उत्साह और देशभक्ति के माहौल में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया. विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर तिरंगे को सलामी दी. इस दौरान विधायक, पूर्व विधायक, विधानसभा सचिवालय के अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे. ध्वजारोहण के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने स्वतंत्रता दिवस के महत्व और देश के विकास की दिशा पर अपने विचार साझा किए.

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अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सिर्फ जश्न मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन बलिदानों को याद करने का दिन है, जिनकी बदौलत देश को आजादी मिली. उन्होंने कहा कि आज का दिन हमें अपने अतीत से सीखने, वर्तमान की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी तय करने का अवसर देता है. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायकों को याद करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को जन आंदोलन का स्वरूप दिया, जबकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने साहस और राष्ट्रभक्ति की मिसाल पेश की. जवाहरलाल नेहरू समेत अनेक नेताओं ने स्वतंत्र भारत के निर्माण की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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झारखंड के वीरों के योगदान को किया याद
विधानसभा अध्यक्ष ने झारखंड की धरती के उन महान आदिवासी नायकों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया. उन्होंने बाबा तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और धरती आबा बिरसा मुंडा के संघर्ष का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन वीरों की लड़ाई सिर्फ विदेशी शासन के खिलाफ नहीं थी, बल्कि जल-जंगल-जमीन, सम्मान और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए भी थी. उन्होंने कहा कि 1947 में देश को राजनीतिक आजादी मिली, लेकिन इसके साथ राष्ट्र निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी भी सामने आई. संविधान लागू होने के बाद भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया और हर नागरिक को समान राजनीतिक अधिकार दिए.

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लोकतंत्र में असहमति का भी महत्व
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं है. संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, संस्थाओं की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के प्रति जवाबदेही लोकतंत्र के जरूरी आधार हैं. उन्होंने कहा कि विधानसभा जनता की समस्याओं, उम्मीदों और सवालों को उठाने का संवैधानिक मंच है. उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष की राजनीतिक भूमिकाएं भले अलग हों, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सभी की जिम्मेदारी समान है. लोकतंत्र में सवाल पूछना और असहमति रखना कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का संकेत है.

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विधानसभा अध्यक्ष ने देश की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कृषि, उद्योग, विज्ञान, शिक्षा, तकनीक और डिजिटल सेवाओं में हुए बदलावों को महत्वपूर्ण बताया. हालांकि उन्होंने कहा कि विकास का असली मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, कृषि और छोटे कारोबार को मजबूत करने पर जोर दिया. झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य के खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले लाभ में स्थानीय समाज और आने वाली पीढ़ियों की भी हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि संथाल परगना जैसे क्षेत्रों में विकास का मतलब केवल सड़क और भवन बनाना नहीं है. बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कृषि, वनोपज का उचित मूल्य और स्थानीय भाषा-संस्कृति का सम्मान भी विकास का हिस्सा होना चाहिए. अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का संकल्प लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश को ऐसा लोकतंत्र बनाना होगा जहां संविधान सर्वोच्च रहे, विकास की रफ्तार तेज हो और किसी व्यक्ति का जन्म उसके भविष्य की सीमा तय न करे. उन्होंने सभी से अधिक समतामूलक, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया.