रांची(RANCHI):नई दिल्ली में दो दिवसीय नेशनल स्टेक होल्डर्स मीट का आयोजन राज्य सरकार ने किया है. जिससे राज्य में निवेश की गति तेजी से बढ़ सके. लेकिन इस मीट पर भाजपा ने सवाल उठाया है. प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर पूछा की आखिर दो बार विदेश और कोलकाता में निवेश को लेकर कार्यक्रम में सीएम जा चुके है. ऐसे में जनता को बताने की जरूरत है कि आखिर अबतक की यात्रा में कितना निवेश हुआ. जनता को भ्रमित कर सरकार अपनी चांदी काट रही है. सबसे बड़ा धोखा वही होता है, जब जनता को सुनहरे सपने दिखाए जाएं और फिर उन्हें बीच रास्ते में ही तोड़ दिया जाए.
संदीप वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने युवाओं को रोजगार का सपना दिखाया, लेकिन लाखों युवा आज भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं. महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिया गया, लेकिन प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं. अब सरकार नए उद्योगों और निवेश का सपना दिखा रही है, जबकि धरातल पर इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है.
उन्होंने ने कहा निवेश संबंधी इस स्टेक होल्डर मीट में दूसरे विभागों के मंत्री उपस्थित दिखे लेकिन राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दिल्ली में रहते इस महत्वपूर्ण बैठक से दूर रहकर इसकी गंभीरता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है . इससे भी ये प्रतीत होता है होटल ताज की ये मीट सिर्फ यहाँ के लोगो के साथ छलावा है .
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री से सात वर्षों का हिसाब मांगती है. मुख्यमंत्री बताएं कि उनके कार्यकाल में झारखंड में कितने बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं और उनसे कितने स्थायी रोजगार का सृजन हुआ है. जानकारी के अनुसार सरकार एक भी बड़ा उद्योग स्थापित कराने में सफल नहीं रही है.
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री अपने पूरे प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वीडन, स्पेन, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन की यात्रा पर गए थे. अब उस यात्रा को एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है. सरकार को बताना चाहिए कि इस विदेश दौरे पर राज्य की जनता के कर के कितने पैसे खर्च किए गए और उसके बदले झारखंड को अब तक कितना वास्तविक निवेश प्राप्त हुआ तथा कितनी परियोजनाएं धरातल पर उतरीं.
उन्होंने कहा कि यदि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और डिजिटल गवर्नेंस की बात करती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक राज्य में कितने आईटी पार्क, स्टार्टअप हब, टेक्नोलॉजी सेंटर या इनोवेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिससे झारखंड के युवाओं को आधुनिक रोजगार के अवसर मिल सकें.
पर्यटन नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला राज्य है, लेकिन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आज भी सड़क, पेयजल, शौचालय, आवास, सुरक्षा और प्रचार-प्रसार जैसी बुनियादी सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं. सरकार बताए कि पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं.
उन्होंने कहा कि किसी भी निवेशक के लिए सबसे पहली आवश्यकता सुरक्षित, पारदर्शी और कानून आधारित वातावरण होती है. झारखंड में लगातार बढ़ती रंगदारी, अपराध, अवैध खनन और भ्रष्टाचार की घटनाएं निवेशकों का विश्वास कमजोर करती हैं. सरकार स्पष्ट करे कि इन गंभीर समस्याओं पर अब तक कौन-कौन से प्रभावी और परिणामकारी कदम उठाए गए हैं. वर्मा ने कहा कि सरकार वर्षों से निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम का दावा करती रही है, लेकिन उद्योग जगत आज भी प्रक्रियाओं की जटिलता और देरी की शिकायत करता है. मुख्यमंत्री बताएं कि इस व्यवस्था को वास्तव में प्रभावी बनाने के लिए क्या सुधार किए गए हैं और उसका क्या परिणाम सामने आया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने का दावा करते हुए योजनाओं की घोषणा तो की, लेकिन नए उद्यमियों और नवाचार आधारित स्टार्टअप को आवश्यक सहयोग नहीं मिल सका. जबकि केंद्र सरकार लगातार स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों का सहयोग कर रही है.
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अब केवल घोषणाएं और बड़े-बड़े भाषण नहीं बल्कि जमीन पर परिणाम चाहती है. मुख्यमंत्री को निवेश, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए. भाजपा राज्य सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा करती है तथा जनता के हितों से जुड़े इन सवालों का उत्तर मांगती रहेगी. प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी तारिक इमरान और नीरज सिंह भी मौजूद रहे.

