झारखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अब कुत्तों की भी पहरेदारी करनी होगी,नये आदेश से क्यों बढ़ी परेशानी 

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के नए आदेश के बाद अब सरकारी स्कूल के शिक्षकों को कुत्तों की भी पहरेदारी करनी होगी. पढ़ाई के अतिरिक्त कामों के लोड से दबे झारखंड के सरकारी शिक्षकों को अब एक नया काम भी मिल गया है. अब वह स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ कुत्तों की भी पहरेदारी करेंगं.

झारखंड के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अब कुत्तों की भी पहरेदारी करनी होगी,नये आदेश से क्यों बढ़ी परेशानी

टीएनपी डेस्क:  झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के नए आदेश के बाद अब सरकारी स्कूल के शिक्षकों को  कुत्तों की भी पहरेदारी करनी होगी.  पढ़ाई के अतिरिक्त कामों के लोड से दबे झारखंड के सरकारी शिक्षकों को अब एक नया काम भी मिल गया है.  अब वह स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ कुत्तों की भी पहरेदारी करेंगे.  नए आदेश में कहा गया है की स्कूल परिसर में स्वच्छता एवं आवारा कुत्तों के प्रवेश की रोकथाम के लिए नोडल पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगें.  नोडल पदाधिकारी का विवरण विद्यालय के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित किए जाएंगें. 

नोडल पदाधिकारी का विवरण निगम, निकाय को भी दिया जाएगा.  स्कूल में आवारा कुत्तों से बचाव की व्यवस्था का 3 महीने पर निरीक्षण भी किया जाएगा.  उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि विद्यालय परिसर में आवारा  कुत्तों का प्रवेश और निवास रोका जाए.  बच्चों और कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था का भी  निर्देश दिया गया है.  इसी के तहत जिलों को निर्देश दिया गया है.  बताया जाता है कि सभी स्कूलों में आवारा कुत्तों को परिसर में प्रवेश रोकने के लिए चाहरदीवारी , गेट अथवा अन्य सुरक्षा उपलब्ध कराने को भी कहा गया है.  कहा गया है कि आवारा  पशुओं के आकर्षण के स्रोत को भी खत्म करने के उपाय किये जाये.  

उल्लेखनीय है कि धनबाद सहित झारखंड के सरकारी स्कूलों के भवन की हालत ठीक नहीं है.  कहीं चारदीवारी टूटे हुए हैं तो कहीं भवन जर्जर हैं.  कहीं शिक्षकों की कमी है, दूसरी ओर शिक्षकों पर पढ़ाई के साथ-साथ अन्य काम का भार थोप  दिया जाता है.  इससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है.  वैसे तो शिक्षकों की प्रमुख शैक्षणिक जिम्मेदारी में तय किया गया है कि ते पाठ्यक्रम के अनुसार क्लास में पढ़ाएंगे , छात्रों की कॉपियां जांचेंगे  और परीक्षा लेंगें.  कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान देंगें , बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करेंगें.  मिड डे मील योजना की देखरेख करेंगें.  सरकारी योजनाओं का प्रबंधन , समय-समय पर जनगणना या चुनाव जैसे गैर शैक्षणिक सरकारी कार्यों को पूरा करेंगें.  स्कूलों में बच्चों का नामांकन और ठहराव बढ़ाना, लेकिन अब उन्हें कुत्ता भी भगाना होगा.