ब्रेन स्ट्रोक को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, रांची के क्यूरेस्टा हॉस्पिटल ने शुरू किया 7 दिवसीय जागरूकता अभियान
विश्व स्ट्रोक दिवस सप्ताह के तहत रांची के क्यूरेस्टा हॉस्पिटल में सात दिवसीय जागरूकता अभियान शुरू हुआ. सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. संजय कुमार ने ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज की अहमियत बताई. अस्पताल ने स्ट्रोक हेल्पलाइन नंबर 8893802259 भी जारी किया.
रांची (Ranchi) : ब्रेन स्ट्रोक यानी दिमाग का दौरा एक गंभीर स्थिति है, जिसमें समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है. हालांकि, अगर इसके लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत अस्पताल पहुंचा जाए, तो गंभीर नुकसान से बचने की संभावना बढ़ सकती है. इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए रांची के क्यूरेस्टा हॉस्पिटल में शुक्रवार को सात दिवसीय जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई.
29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व स्ट्रोक दिवस के मद्देनजर शुरू किए गए इस अभियान का नेतृत्व अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष और सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. संजय कुमार ने किया. इस दौरान उन्होंने लोगों को ब्रेन स्ट्रोक के कारणों, लक्षणों, बचाव और समय पर इलाज की अहमियत के बारे में बताया. डॉ. संजय कुमार ने समझाया कि जब मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है, तो ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है. ऐसी स्थिति में हर मिनट कीमती होता है. इसलिए मरीज को घरेलू उपचार में उलझाने या लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. उन्होंने स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए FAST ( चेहरे पर कोई बदलाव के संकेत मिले) नियम की जानकारी दी. इसके तहत चेहरे का एक तरफ झुकना (Face), हाथ में कमजोरी (Arm), बोलने में परेशानी (Speech) और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना (Time) शामिल है. उन्होंने लोगों को संतुलित भोजन करने, नियमित व्यायाम करने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह भी दी.
इस अभियान की प्रमुख पहल के तहत क्यूरेस्टा हॉस्पिटल ने ब्रेन स्ट्रोक हेल्पलाइन नंबर 8893802259 जारी किया है. इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक समय पर जरूरी जानकारी और सहायता पहुंचाना है. कार्यक्रम के दौरान स्ट्रोक से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे कुछ मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए. डॉ. संजय कुमार ने उन्हें टोकन ऑफ एप्रिसिएशन देकर सम्मानित किया. इस मौके पर रंजुम अहमद अंसारी और डॉ. मेजर रमेश दास भी मौजूद रहे.
अस्पताल की ओर से बताया गया कि सात दिनों तक चलने वाले इस अभियान में अलग-अलग विषयों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा.
ध्यान रखें, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है. चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ में अचानक कमजोरी या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें. समय पर इलाज मिलने से जान बचाने और गंभीर नुकसान को कम करने की संभावना बढ़ सकती है.