आदिवासी नेत्री निशा भगत मौत मामले पर छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो का फूटा गुस्सा, निष्पक्ष जांच की मांग
आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत से आदिवासी समाज और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है. बताया जा रहा है कि कथित मानसिक तनाव और लगातार हो रही बदनामी से परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
रांची (RANCHI): झारखंड की चर्चित आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत से आदिवासी समाज और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है. बताया जा रहा है कि कथित मानसिक तनाव और लगातार हो रही बदनामी से परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया था. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना से पहले उन्होंने सोशल मीडिया फेसबूक पर लाइव आकर अपना दर्द बयां किया था. इस मामले को लेकर अब झारखंड JLKM नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है.
JLKM नेता ने उठाए सवाल
JLKM नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर निशा भगत की मौत पर दुख जताया. उन्होंने लिखा, “एक आदिवासी बेटी की पुकार… आखिर जवाबदेह कौन? गुमला की पूर्व प्रत्याशी, संघर्षशील साथी निशा भगत जी अब हमारे बीच नहीं हैं. उन्होंने जाते-जाते कई सवाल छोड़ दिए. एक बेबाक आदिवासी बेटी को आखिर क्यों ऐसा कदम उठाना पड़ा?” नेता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि संगठन अलग हो सकता है, लेकिन मानवता का रिश्ता कभी अलग नहीं होता.
लाइव वीडियो में छलका था दर्द, अकेलेपन का किया था जिक्र
आत्मघाती कदम उठाने से पहले सोशल मीडिया पर लाइव आईं निशा भगत काफी भावुक नजर आ रही थीं. वीडियो में उन्होंने रोते हुए कहा था कि मुश्किल वक्त में उनके साथ कोई खड़ा नहीं है और वह लंबे समय से अकेले संघर्ष कर रही हैं. उन्होंने खुद को दलाल कहे जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि वह किसी की दलाल नहीं हैं. उनका आरोप था कि कुछ लोग लगातार उन्हें बदनाम कर रहे हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने पिठोरिया थाना प्रभारी से फोन पर बात करते हुए अपनी जिंदगी खत्म करने की बात भी कही थी.
आदिवासी अस्मिता के मुद्दों पर रहती थीं मुखर
निशा भगत आदिवासी समाज के अधिकारों, आदिवासी अस्मिता और सरना धर्म से जुड़े मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखती थीं. पिछले वर्ष सरना धर्म से संबंधित मांगों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से अपना सिर मुंडवाया था, जिसके बाद वह चर्चा में आई थीं.