JPSC नियुक्ति घोटाले में बढ़ा जांच का दायरा, अनिमा हांसदा से लेकर बाबूलाल मरांडी के करीबी तक जांच के घेरे में

झारखंड में नियुक्ति घोटाले की जांच का दायरा बढ़ गया है. वर्ष 2014 के बाद हुई नियुक्तियों से जुड़ी 17 परीक्षाओं को अब जांच के दायरे में शामिल किया गया है.

JPSC नियुक्ति घोटाले में बढ़ा जांच का दायरा, अनिमा हांसदा से लेकर बाबूलाल मरांडी के करीबी तक जांच के घेरे में

रांची: झारखंड में कथित नियुक्ति घोटाले की जांच अब और व्यापक होती जा रही है. CID की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और नियुक्तियों में संभावित अनियमितताओं के मद्देनजर कई पुरानी परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है. इसी क्रम में JPSC की पूर्व सदस्य अनिमा हांसदा और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के एक करीबी रिश्तेदार का नाम भी जांच के दायरे में आने की जानकारी सामने आई है. हालांकि, जांच में उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है.

राज्य सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए वर्ष 2014 के बाद आयोजित विभिन्न परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों की भी समीक्षा का निर्णय लिया है. सरकार के निर्देश के बाद कुल 17 परीक्षाओं को विशेष तौर पर जांच के दायरे में रखा गया है. इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित परीक्षाओं और नियुक्तियों में कहीं नियमों की अनदेखी, अनियमितता या किसी प्रकार की गड़बड़ी तो नहीं हुई.

CID की जांच में अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने तथा छह अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों को भी इसमें शामिल किया गया है. मुख्यमंत्री की ओर से नियुक्तियों में संभावित अनियमितताओं की जांच के संबंध में की गई घोषणा के बाद यह कदम उठाया गया है.

इस संबंध में कार्मिक विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया है. आदेश संख्या 6-लो0से0आ0-01-07/का-5406 के तहत 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है. अब CID इन परीक्षाओं से संबंधित रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी.

जांच एजेंसी की कार्रवाई आगे बढ़ने के साथ ही कई पुराने मामलों की परतें खुलने की संभावना है. हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता को लेकर अंतिम दावा करना उचित नहीं होगा. आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्ष के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.