राजकीय शोक के चलते 7 सितंबर को झारखंड के सरकारी स्कूल-कॉलेज बंद, प्राइवेट संस्थानों पर फैसला नहीं

झारखंड में राजकीय शोक के चलते 7 सितंबर को सभी सरकारी स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे. इस दिन शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित नहीं होंगी. प्राइवेट स्कूल को लेकर अभी स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं है.

राजकीय शोक के चलते 7 सितंबर को झारखंड के सरकारी स्कूल-कॉलेज बंद, प्राइवेट संस्थानों पर फैसला नहीं

रांची (RANCHI): झारखंड में 7 सितंबर को सरकारी स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई नहीं होगी. राजकीय शोक के मद्देनजर राज्य सरकार ने इस दिन सरकारी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला लिया है. इसका सीधा असर राज्य के लाखों विद्यार्थियों और शिक्षकों पर पड़ेगा. उन्हें 7 सितंबर को स्कूल या कॉलेज जाने की जरूरत नहीं होगी. झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शोक के मद्देनजर 7 सितंबर को राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी. यानी इस दिन कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी , वही प्राइवेट स्कूलों और कॉलेज को लेकर फिलहाल कोई दिशा निर्देश जारी नहीं की गई है.

राष्ट्रीय शोक के तहत राज्य में सरकारी कार्यालयों और कई अन्य सरकारी संस्थानों को भी बंद रखने का निर्णय लिया गया है. ऐसे में 7 सितंबर को सरकारी कामकाज भी प्रभावित रहेगा. सरकार की ओर से जारी व्यवस्था के तहत संबंधित विभागों और संस्थानों में नियमित गतिविधियां नहीं होंगी. स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने के फैसले के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भी स्थिति स्पष्ट हो गई है. खासकर उन छात्रों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, जिनकी 7 सितंबर को कक्षाएं या किसी तरह की शैक्षणिक गतिविधियां निर्धारित थीं.

दरअसल, राष्ट्रीय शोक के दौरान सरकारी स्तर पर कई तरह के कार्यक्रम और नियमित गतिविधियां स्थगित या सीमित कर दी जाती हैं. इसी क्रम में झारखंड में भी सरकारी शिक्षण संस्थानों को 7 सितंबर को बंद रखने का निर्णय लिया गया है. शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला केवल एक दिन के लिए लागू रहेगा. इसके बाद सरकारी स्कूल और कॉलेज अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दोबारा संचालित होंगे. विद्यार्थियों और शिक्षकों को सलाह दी गई है.  राज्य में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के बंद रहने से शिक्षण व्यवस्था पर एक दिन का असर पड़ेगा, लेकिन राजकीय  शोक के प्रोटोकॉल को देखते हुए यह निर्णय लागू किया गया है. निजी शिक्षण संस्थानों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए गया है.