Ranchi: आज रिनपास मनाएगा 101वां स्थापना दिवस, ‘Artificial Intelligence in RINPAS’ होगी समारोह की थीम

RINPAS आज अपना 101वां स्थापना दिवस मनाएगा. इस वर्ष समारोह की थीम ‘Artificial Intelligence in RINPAS’ है. कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में AI के इस्तेमाल, मरीजों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा पर चर्चा होगी.

Ranchi: आज रिनपास मनाएगा 101वां स्थापना दिवस, ‘Artificial Intelligence in RINPAS’ होगी समारोह की थीम

रांची (RANCHI): रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (RINPAS) आज अपना 101वां स्थापना दिवस मनाएगा. इस मौके पर संस्थान परिसर स्थित जे.ई. धुंजीभॉय एकेडमिक एंड रिसर्च सेंटर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस वर्ष समारोह की थीम ‘Artificial Intelligence in RINPAS’ रखी गई है. कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और इसकी संभावनाओं पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे. समारोह में RINPAS के 101 वर्षों के सफर पर आधारित स्मारिका का भी विमोचन किया जाएगा. स्मारिका में संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ चिकित्सा शिक्षा, मरीजों के इलाज, शोध और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी शामिल होगी. संस्थान का यह सफर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उसकी लंबे समय से जारी सेवाओं को दर्शाता है और स्थापना दिवस पर इसके योगदान को भी रेखांकित किया जाएगा.

वैज्ञानिक सत्र में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में AI की संभावित भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी. विशेषज्ञ मानसिक बीमारियों की शुरुआती पहचान, मरीजों के उपचार, फॉलो-अप और इलाज की निगरानी में तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार रखेंगे. इसके अलावा मेडिकल शिक्षा, वैज्ञानिक शोध और स्वास्थ्य संबंधी डेटा के बेहतर इस्तेमाल में AI किस तरह मददगार साबित हो सकता है, इस पर भी चर्चा होगी. हालांकि, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मरीजों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है. ऐसे में AI के सुरक्षित, जिम्मेदार और मानवीय इस्तेमाल को लेकर जरूरी सावधानियों पर भी विशेषज्ञ अपनी राय साझा करेंगे. उद्देश्य यह समझना है कि आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है.

RINPAS की निदेशक डॉ. जयती सिमलाई ने संस्थान के 101 वर्षों के सफर को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीक और उपचार के नए तरीकों को अपनाना जरूरी है. उनके अनुसार, AI मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है और इससे मरीजों की पहचान से लेकर इलाज व फॉलो-अप तक कई स्तरों पर मदद मिल सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक के इस्तेमाल के दौरान मरीजों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. स्थापना दिवस समारोह इसी दिशा में तकनीक और मानवीय देखभाल के बीच बेहतर संतुलन पर चर्चा का मंच बनेगा.