Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्यभर में जारी छात्रों का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. एक ओर सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति गठित की है, वहीं दूसरी ओर अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन दोनों घटनाक्रमों ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त हो सकता है, जबकि जांच एजेंसियां परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटी हैं.
पिछले 12 दिनों से रांची के कचहरी रोड स्थित जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं. चार छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं और हर दिन आंदोलन में नए लोग शामिल हो रहे हैं. छात्रों की मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित रूप से प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने, भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू करने तथा अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की है. बुधवार को राज्य सरकार ने वार्ता के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई थी. इसके बाद छात्रों ने सार्वजनिक रूप से बातचीत करने और मीडिया की मौजूदगी में चर्चा की मांग रखी थी. गुरुवार सुबह आंदोलनकारी छात्रों ने भी संकेत दिया कि वे अपना प्रतिनिधिमंडल गठित करेंगे, जो सरकार की समिति के साथ बातचीत करेगा. बताया जा रहा है कि छात्र प्रतिनिधियों की औपचारिक घोषणा की जा सकती है.
इसी बीच CID ने थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत रांची और लखनऊ में संयुक्त कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों में उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार, धमेन्द्र कुमार और रक्षक सिंह शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, इन सभी पर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से धोखाधड़ी और अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सफलता हासिल करने का आरोप है. उमाकांत उरांव पर एजेंट के रूप में उम्मीदवार उपलब्ध कराने की भूमिका निभाने का भी आरोप है, जबकि रक्षक सिंह TDPL कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत रहते हुए परीक्षा में कथित गड़बड़ी से लाभ लेने के आरोपों का सामना कर रहा है. छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया है.
CID के अनुसार, JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में अब तक कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी सहित कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. गिरफ्तार लोगों में JPSC से जुड़े अधिकारी और कथित एजेंट भी शामिल हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है तथा पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. वहीं, छात्रों और सरकार के बीच प्रस्तावित वार्ता पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे आंदोलन और परीक्षा विवाद के समाधान की दिशा तय हो सकती है.

