रांची(RANCHI): झारखंड में मंत्री राधा कृष्ण किशोर सुर्खियों में है. पहले पार्टी के अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोला और अब गृह विभाग से नाराजगी दिखाते हुए सुरक्षा कर्मी वापस कर दिए. पिछले 10 दिनों से राधाकृष्ण किशोर बिना किसी सुरक्षा के घूम रहे है. लेकिन किसी अधिकारी ने उनसे दोबारा इस मुद्दे पर चर्चा करना भी मुनासिब नहीं समझा. ऐसे में अब विपक्ष भी चुटकी लेने लगा. लेकिन हाल के दिनों में हुए घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दिया कि राधाकृष्ण किशोर फंस गए है. सरकार में होते हुए अधिकारी से नहीं बन रही तो दूसरी तरफ पार्टी में है लेकिन कही कोई तालमेल नहीं है.
अब पूरा मामला समझिए राधाकृष्ण किशोर हेमंत सरकार में शामिल है. राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेवारी निभा रहे है. लेकिन अचानक पिछले तीन महीने से राधाकृष्ण किशोर की राजनीति पार्टी से हट कर शुरू हुई. संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल खड़ा कर दिया. वह भी किसी बैठक या बंद कमरे में नहीं बल्कि खुलेआम मीडिया के सामने. इसके बाद कई बयान सामने आया. जिसमें सीधे प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर निशाना बनाया गया.
इसके बाद जुलाई में फिर अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. जिसमें कहा कि अधिकारी खुद को मंत्री से ऊपर समझने लगे है. इसके पीछे की कहानी इतना है कि मंत्री के पास 16 सुरक्षाकर्मी है. लेकिन 16 सुरक्षा कर्मी में उन्हे तीन गाड़ी मिली है. ऐसे में सुरक्षा कर्मी को साथ लेकर घूमने में उन्हे दिक्कत होती है. विभाग से एक और पत्र लिख कर गाड़ी की डिमांड की है. लेकिन पुलिस मुख्यालय ने उल्टा उनके काफिले में शामिल तीन में से एक गाड़ी को वापस मांग लिया.
जिससे गुस्से में राधाकृष्ण किशोर ने सभी गाड़ी को वापस कर दिया. साथ ही सभी जवानों को लौटा दिया गया. और बिना सुरक्षा के ही घूमने लगे.मंत्री ने बताया कि उन्हे 16 जवान मिले है और तीन गाड़ी में उन्हे यात्रा करने में दिक्कत आती है जवानों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है. लेकिन अधिकारी इसे नजर अंदाज कर रहे है. इस बीच मंत्री ने फिर एक पत्र राज्य की DGP को लिखा है. जिसमें सीधे तौर पर सवाल खड़ा कर दिया और पूछा की मंत्री से लेकर झारखंड के लोगों की सुरक्षा के लिए क्या नीती है.
पूरे महकमे पर सवाल खड़ा किया और लिखा की जमशेदपुर की घटना ने साबित कर दिया है कि राज्य में पुलिसींग फेल हो गई है. बजट और संसाधन के बाद भी सुरक्षा सिर्फ कागजों पर दिखने लगी. PCR वैन में एक भी जवान नहीं रहता है. ड्राइवर और एक पुलिस पदाधिकारी को तैनात किया जाता है. ऐसे में वह खुद असुरक्षित महसूस कर रहे है. डीजीपी को मंत्री ने लिखा है कि हठधर्मिता छोड़ कर सुरक्षा को बेहतर करने पर जोर दीजिए.
इन सब घटनाक्रम के बाद चर्चा है कि राधाकृष्ण किशोर इस्तीफा भी दे सकते है. हलाकी इसपर उन्होंने अब तक कोई बयान नहीं दिया है. लेकिन जिस तरह से तेवर हाल के दिनों में मंत्री का दिखा है. उसके बाद गाड़ी और सुरक्षाकर्मी को वापस भेज देना कोई सामान्य बात नहीं है. आगे हो सकता है कि वह कोई बड़ा कदम उठाए. क्योंकि माना जाता है कि राधाकृष्ण किशोर कभी भी झुक कर कहीं भी नहीं रहते है. सिद्धांत और नीती के पक्के है. जिसके जिक्र उन्होंने पहले भी किया है. उन्होंने बताया था की इस काफिले के मामले को मुख्यमंत्री से मिल कर खत्म कर सकते है. लेकिन जब प्रोटोकाल में वह खुद है तो फिर बात ही नहीं बनती है.
इस पूरे विवाद पर भाजपा ने चुटकी ली है. पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने सवाल उठाया और पूछा की आखिर सरकार में चल क्या रहा है. उन्होंने लिखा की राधाकृष्ण किशोर पलामू से है. ऐसे में उन्हे सुरक्षा वापस नहीं करनी चाहिए. लेकिन आगे भानु प्रताप शाही ने कहा कि जब सरकार में गलत का समर्थन कर रहे थे उस समय आवाज उठाते तो और बेहतर रहता. लेकिन देर से ही अपने अंदाज में तो दिखे है.

